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आरती, चालीसा, स्तोत्र और मंत्र

आरती, चालीसा, स्तोत्र, मंत्र और नामावली: हर पाठ पूरा, और जहाँ लिखा जा चुका है वहाँ उसका सरल हिंदी अर्थ।

आरती

चालीसा

स्तोत्र

अष्टकम

कवच

मंत्र

भजन

श्लोक

नामावली

पूजा विधि

पाठ

उपाय

  • सूर्य ग्रह के उपाय

    सूर्य

    सूर्य के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • चंद्र ग्रह के उपाय

    चंद्र, शिव

    चंद्र के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • मंगल ग्रह के उपाय

    मंगल, हनुमान, कार्तिकेय

    मंगल के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • बुध ग्रह के उपाय

    बुध, विष्णु

    बुध के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • गुरु (बृहस्पति) ग्रह के उपाय

    बृहस्पति, विष्णु

    गुरु के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • शुक्र ग्रह के उपाय

    शुक्र, महालक्ष्मी

    शुक्र के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • शनि ग्रह के उपाय

    शनि, हनुमान, शिव

    शनि के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • राहु ग्रह के उपाय

    राहु, माँ दुर्गा, शिव

    राहु के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • केतु ग्रह के उपाय

    केतु, गणेश

    केतु के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।

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  • सूर्य महादशा के उपाय

    सूर्य, शिव, माँ दुर्गा, विष्णु

    सूर्य की 6 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • चंद्र महादशा के उपाय

    चंद्र, शिव, विष्णु

    चंद्र की 10 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • मंगल महादशा के उपाय

    मंगल, शिव, विष्णु, माँ दुर्गा, महालक्ष्मी, नाग देवता

    मंगल की 7 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • बुध महादशा के उपाय

    बुध, विष्णु, माँ दुर्गा, महालक्ष्मी, शिव

    बुध की 17 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • गुरु महादशा के उपाय

    बृहस्पति, शिव, विष्णु, माँ दुर्गा

    गुरु की 16 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • शुक्र महादशा के उपाय

    शुक्र, माँ दुर्गा, शिव, विष्णु

    शुक्र की 20 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • शनि महादशा के उपाय

    शनि, शिव, विष्णु, माँ दुर्गा

    शनि की 19 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • राहु महादशा के उपाय

    राहु, शिव, विष्णु, माँ दुर्गा, महालक्ष्मी

    राहु की 18 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • केतु महादशा के उपाय

    केतु, माँ दुर्गा, शिव, विष्णु

    केतु की 7 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।

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  • मंगल दोष (मांगलिक दोष) के उपाय

    हनुमान, मंगल

    मंगल दोष क्या माना जाता है, शास्त्र में इसका आधार कहाँ है, और परंपरा के अभ्यास: हनुमान उपासना, मंगलवार व्रत, मंत्र-जप और दान। शांत मन से, डर के बिना।

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  • कालसर्प दोष के उपाय

    शिव, नाग देवता, राहु, केतु

    कालसर्प दोष क्या माना जाता है, इसके बारह नाम किस आधार पर हैं, और परंपरा के सरल अभ्यास: शिव उपासना, ॐ नमः शिवाय का जप और नाग पंचमी। बिना डर और बिना महँगी पूजा के।

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  • पितृ दोष के उपाय

    पितृ देव, विष्णु

    पितृ दोष किसे कहा जाता है, शास्त्र में इसका आधार क्या है, और पूर्वजों की स्मृति में परंपरा के अभ्यास: तर्पण, श्राद्ध, अमावस्या और पितृ पक्ष में भोजन-दान। श्रद्धा से, डर के बिना।

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  • ग्रहण दोष के उपाय

    सूर्य, चंद्र, शिव

    कुंडली में सूर्य या चंद्र के साथ राहु या केतु हों तो उसे ग्रहण दोष कहा जाता है। यह पेज इसका आधार, मतभेद और परंपरा के सरल अभ्यास बताता है: सूर्य को अर्घ्य, सोमवार की शिव पूजा, मंत्र-जप और दान।

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  • गुरु चांडाल दोष के उपाय

    बृहस्पति, राहु

    कुंडली में गुरु (बृहस्पति) और राहु एक ही राशि में हों तो उसे गुरु चांडाल दोष कहा जाता है। यह पेज इसका आधार, मतभेद और परंपरा के अभ्यास बताता है: गुरुवार, गुरु मंत्र, शिक्षकों का सम्मान और दान।

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  • केमद्रुम योग (केमद्रुम दोष) के उपाय

    चंद्र, शिव

    जब कुंडली में चंद्र के दोनों ओर के भावों में कोई ग्रह न हो, तो उसे केमद्रुम योग कहा जाता है। यह पेज इसका शास्त्रीय आधार, भंग के नियम और परंपरा के अभ्यास बताता है: सोमवार, चंद्र मंत्र, शिव उपासना।

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  • श्रापित दोष के उपाय

    शनि, राहु, हनुमान

    कुंडली में शनि और राहु एक ही राशि में हों तो उसे श्रापित दोष कहा जाता है। यह पेज बताता है कि यह नाम कहाँ से आया और परंपरा के कौन से अभ्यास हैं: शनिवार, शनि और राहु मंत्र, हनुमान चालीसा, सेवा और दान।

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  • सर्प दोष (नाग दोष) के उपाय

    नाग देवता, कार्तिकेय

    सर्प दोष या नाग दोष की परंपरा क्या है, शास्त्र में इसका आधार कहाँ है, और नाग देवता की पूजा के परंपरागत अभ्यास: नाग पंचमी, नाग प्रतिमा की पूजा और सर्प-वनों की रक्षा।

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  • नारायण नागबलि

    विष्णु, नाग देवता

    नारायण नागबलि एक पारिवारिक विधि है, जो त्र्यंबकेश्वर में पुरोहितों द्वारा तीन दिन में कराई जाती है। यह पेज बताता है कि यह विधि क्या है, इसका आधार क्या बताया जाता है और इस पर कहाँ मतभेद हैं।

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  • कालसर्प शांति पूजा

    शिव, नाग देवता, राहु, केतु

    कालसर्प शांति पूजा पुरोहितों द्वारा कराई जाने वाली विधि है, जो त्र्यंबकेश्वर और श्रीकालहस्ती जैसे तीर्थों में प्रसिद्ध है। यह पेज बताता है कि यह क्या है, मंदिर जाना वैकल्पिक क्यों है और घर पर क्या किया जा सकता है।

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  • अमावस्या जन्म शांति

    सूर्य, चंद्र

    अमावस्या तिथि पर हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति की विधि: कलश, सूर्य-चंद्र पूजन, हवन, अभिषेक और दान, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • कृष्ण चतुर्दशी जन्म शांति

    शिव, नवग्रह

    कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: शिव-प्रतिमा का पूजन, वरुण-कलश, नवग्रह पूजन, हवन और अभिषेक, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • ग्रहण जन्म शांति

    सूर्य, चंद्र, राहु

    सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: नक्षत्र-देवता, सूर्य या चंद्र और राहु की प्रतिमाओं का पूजन, उनके वैदिक मंत्र, हवन और अभिषेक। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • संक्रांति जन्म शांति

    सूर्य, चंद्र, शिव, नवग्रह

    सूर्य के राशि बदलने के क्षण (संक्रांति) पर हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: नवग्रह कलश, संक्रांति-सूर्य-चंद्र पूजन, त्र्यम्बक मंत्र का जप, हवन और अभिषेक। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • भद्रा जन्म शांति

    विष्णु, शिव

    भद्रा (विष्टि करण), तिथि-क्षय और व्यतीपात जैसे योगों में हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई सरल शांति: विष्णु-पूजन, शिव मंदिर में घी का दीपक, पीपल की परिक्रमा और हवन। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • एक नक्षत्र जन्म शांति

    चंद्र

    जब शिशु का जन्म उसी नक्षत्र में हो जिसमें परिवार के किसी सदस्य का हुआ था, तब परंपरा में बताई गई शांति: जन्म-नक्षत्र की प्रतिमा का कलश पर पूजन, 108 आहुतियाँ और कलश-जल का छिड़काव। केवल विधि।

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  • गंडमूल शांति

    शिव, केतु, बुध

    अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई गंडमूल शांति: शास्त्र का आधार, प्रचलित समय, नक्षत्र-देवता और त्र्यम्बक मंत्र। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • आश्लेषा गंडमूल

    नाग देवता, बुध

    आश्लेषा नक्षत्र में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई गंडमूल शांति: शास्त्र में आश्लेषा-मघा की संधि, नक्षत्र-देवता नाग का पूजन, हवन और अभिषेक। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।

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  • ज्येष्ठा गंडमूल

    शिव, बुध

    ज्येष्ठा नक्षत्र में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: शास्त्र की ज्येष्ठा गंडांत शांति में ऐरावत पर बैठे इंद्र की प्रतिमा, हवन, अभिषेक, इंद्र सूक्त और त्र्यम्बक मंत्र का जप। केवल विधि।

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  • मूल नक्षत्र गंडमूल शांति

    शिव, केतु

    मूल नक्षत्र में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति, और ज्येष्ठा-मूल संधि (अभुक्त मूल) की शास्त्रीय शांति: समय, प्रतिमा, कलश, त्र्यम्बक मंत्र से हवन और अभिषेक। केवल विधि।

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  • गंडांत

    नवग्रह

    गंडांत यानी तिथि, नक्षत्र या लग्न की संधि का भाग। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में इसकी तीन परिभाषाएँ और संधि पर हुए जन्म के लिए शांति: प्रकार के अनुसार दान, प्रतिमा-पूजन, अभिषेक और हवन। केवल विधि।

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  • शनि की साढ़ेसाती के उपाय

    शनि, हनुमान, शिव

    शनि की साढ़ेसाती क्या है और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: शनि मंत्र, दशरथ कृत स्तोत्र, हनुमान और शिव की उपासना, शनिवार का दान और सेवा। डर नहीं, धैर्य और अच्छे आचरण के साथ।

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  • शनि की ढैय्या के उपाय

    शनि, हनुमान, शिव

    शनि की ढैय्या क्या है, जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में होते हैं, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: शनि मंत्र, हनुमान और शिव की उपासना, शनिवार का दान। शांत मन से, अपनी सामर्थ्य भर।

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  • शनि गोचर के उपाय

    शनि, हनुमान, शिव

    शनि का गोचर चंद्र राशि से कैसे देखा जाता है, फलदीपिका किन स्थानों को अनुकूल मानती है, और प्रतिकूल गोचर में परंपरा कौन-से अभ्यास बताती है: पाठ, पूजा, दान और सेवा।

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  • राहु-केतु गोचर के उपाय

    राहु, केतु, माँ दुर्गा, शिव, गणेश

    राहु और केतु का गोचर क्या है, वे उलटी चाल से लगभग 18 महीने में राशि बदलते हैं, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: राहु-केतु के मंत्र, दुर्गा, शिव और गणेश की उपासना, दान और सेवा।

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  • गुरु गोचर के उपाय

    बृहस्पति, विष्णु

    गुरु (बृहस्पति) का गोचर चंद्र राशि से कैसे देखा जाता है, फलदीपिका किन स्थानों को अनुकूल मानती है, और परंपरा कौन-से अभ्यास बताती है: गुरु मंत्र, गुरुवार का व्रत, विष्णु उपासना और पीली वस्तुओं का दान।

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  • विष योग के उपाय

    शिव, चंद्र, शनि

    विष योग किसे कहते हैं, जब शनि और चंद्रमा एक राशि में हों, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: चंद्र और शनि के मंत्र, शिव उपासना, सोमवार और शनिवार का दान, और नियमित दिनचर्या।

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  • अंगारक योग के उपाय

    हनुमान, मंगल, राहु

    अंगारक योग किसे कहते हैं, जब मंगल और राहु एक राशि में हों, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: हनुमान उपासना, मंगल और राहु के मंत्र, मंगलवार-शनिवार का दान, और क्रोध पर संयम।

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  • शकट योग के उपाय

    चंद्र, बृहस्पति, महालक्ष्मी

    शकट योग क्या है, फलदीपिका के अनुसार जब चंद्रमा गुरु से छठे, आठवें या बारहवें स्थान में हों, इसका अपवाद क्या है, और परंपरा कौन-से अभ्यास बताती है: गुरु और चंद्र के मंत्र, श्री सूक्त, सेवा और दान।

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  • नाड़ी दोष और उसका परिहार

    शिव

    कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या है, जब दोनों की नाड़ी एक होने पर 8 में से 0 गुण मिलते हैं, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है; साथ में महामृत्युंजय जप और दान, जो बाद की परंपरा के उपाय हैं।

    पढ़ें: नाड़ी दोष और उसका परिहार

  • भकूट दोष और उसका परिहार

    नवग्रह

    कुंडली मिलान में भकूट दोष क्या है, जब दोनों की चंद्र राशियाँ एक-दूसरे से 6-8, 2-12 या 5-9 पर हों, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है।

    पढ़ें: भकूट दोष और उसका परिहार

  • गण दोष और उसका परिहार

    नवग्रह

    कुंडली मिलान में गण दोष क्या है, जब वर-वधू के नक्षत्रों के गण (देव, मनुष्य, राक्षस) मेल न खाएँ, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है। गण स्वभाव का वर्ग है, चरित्र पर निर्णय नहीं।

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  • नवग्रह शांति

    नवग्रह

    नवग्रह शांति क्या है, बृहत्पराशर होराशास्त्र (अध्याय 84) और याज्ञवल्क्य स्मृति इसके बारे में क्या कहते हैं, और घर पर अपनी सामर्थ्य भर इसे कैसे करें। भक्ति का विधान, डर नहीं।

    पढ़ें: नवग्रह शांति

  • नवग्रह पूजा

    नवग्रह

    नौ ग्रहों की एक साथ पूजा: घर पर संक्षिप्त नवग्रह-पूजन का क्रम, मंदिर के नवग्रह-मंडप की परंपरा, और शास्त्र में इसका आधार।

    पढ़ें: नवग्रह पूजा

  • नवग्रह बीज मंत्र

    नवग्रह

    नौ ग्रहों के बीज मंत्र, एक जगह: जप का सरल तरीका, जप-संख्या पर अलग-अलग परंपराएँ, और चंद्र मंत्र के दो रूप।

    पढ़ें: नवग्रह बीज मंत्र

  • नवग्रह स्तोत्र पाठ

    नवग्रह

    वेदव्यास को समर्पित नौ श्लोकों वाला नवग्रह स्तोत्र: यह क्या है, इसका पाठ कैसे करें, और सूर्य वाले पहले श्लोक का सरल अर्थ।

    पढ़ें: नवग्रह स्तोत्र पाठ

  • वार अनुसार ग्रह उपाय

    नवग्रह

    सप्ताह का हर दिन एक ग्रह से जुड़ा माना जाता है। किस दिन किस देवता की पूजा, कौन-सा पाठ और क्या दान परंपरा में बताया जाता है, स्रोत के साथ।

    पढ़ें: वार अनुसार ग्रह उपाय

  • नवग्रह दान

    नवग्रह

    हर ग्रह के लिए परंपरा में बताया गया दान: शास्त्र की दक्षिणा-सूची और बाद की प्रचलित सूची, दोनों साथ-साथ। दान अपनी सामर्थ्य भर, आदर से।

    पढ़ें: नवग्रह दान

  • नवग्रह मंदिर

    नवग्रह, शिव

    नौ ग्रहों से जुड़े प्रसिद्ध मंदिर: कुंभकोणम के आसपास के नौ नवग्रह मंदिर, शनि शिंगणापुर, उज्जैन का मंगलनाथ और गुवाहाटी का नवग्रह मंदिर। परंपरा की जानकारी, कोई बुकिंग नहीं।

    पढ़ें: नवग्रह मंदिर

  • महामृत्युंजय जाप

    शिव

    ऋग्वेद के त्र्यम्बक मंत्र का जप: मंत्र, उसका सरल अर्थ, वैदिक स्रोत, बृहत्पराशर होराशास्त्र में इसका उल्लेख, और घर पर जप का सरल तरीका।

    पढ़ें: महामृत्युंजय जाप

  • सूर्य अर्घ्य

    सूर्य

    उगते सूर्य को जल अर्पित करना: संध्यावंदन में इसका वैदिक रूप, गायत्री मंत्र और उसका सरल अर्थ, और घर पर रोज़ अर्घ्य देने का सरल तरीका।

    पढ़ें: सूर्य अर्घ्य

  • शनिवार पीपल पूजा

    शनि, शिव

    शनिवार को पीपल (अश्वत्थ) की पूजा और स्पर्श: ब्रह्म पुराण की कथा जिसमें इसका आधार है, घर के पास सरल विधि, और कौन-सी बातें लोक-प्रथा हैं।

    पढ़ें: शनिवार पीपल पूजा

  • ग्रह शांति हेतु हनुमान उपासना

    हनुमान, शनि, मंगल

    मंगलवार और शनिवार को हनुमान की उपासना, जो परंपरा में शनि और मंगल के लिए की जाती है: सरल विधि, हनुमान चालीसा, और शनि-हनुमान कथा किस रूप में मिलती है।

    पढ़ें: ग्रह शांति हेतु हनुमान उपासना

  • विष्णु सहस्रनाम पाठ

    विष्णु, बुध

    भगवान विष्णु के हज़ार नामों का पाठ: महाभारत में इसका स्थान, बृहत्पराशर होराशास्त्र में इसका उल्लेख, और घर पर पाठ का सरल तरीका।

    पढ़ें: विष्णु सहस्रनाम पाठ

  • दुर्गा सप्तशती पाठ

    माँ दुर्गा

    दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य, चंडी पाठ) का पाठ: मार्कंडेय पुराण में इसका स्थान, इसकी तीन कथाएँ, पाठ का पारंपरिक क्रम, और बृहत्पराशर होराशास्त्र में इसका उल्लेख।

    पढ़ें: दुर्गा सप्तशती पाठ