आरती, चालीसा, स्तोत्र और मंत्र
आरती, चालीसा, स्तोत्र, मंत्र और नामावली: हर पाठ पूरा, और जहाँ लिखा जा चुका है वहाँ उसका सरल हिंदी अर्थ।
आरती
सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची - समर्थ रामदास रचित गणपति की मराठी आरती का पूरा पाठ, गणेशोत्सव व नित्य पूजा हेतु।
जय अम्बे गौरी आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी - माँ दुर्गा की आरती का पूरा पाठ हिंदी में, नवरात्रि और दुर्गा पूजा के लिए।
आरती श्री रामायण जी की
आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिय पी की - रामायण व मानस पाठ के आरम्भ और समापन पर गाई जाने वाली आरती का पूरा पाठ।
जय सरस्वती माता आरती
जय सरस्वती माता आरती का पूरा पाठ हिंदी में। वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा पर गाई जाने वाली माँ सरस्वती की लोकप्रिय आरती।
श्री शनिदेव आरती – जय जय श्री शनिदेव
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी – शनिदेव की आरती का पूरा पाठ हिंदी में। शनिवार और शनि जयंती पर गाई जाने वाली आरती।
ॐ जय सूर्य भगवान आरती
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान – सूर्यदेव की आरती का पूरा पाठ हिंदी में। रविवार और छठ पूजा पर गाई जाने वाली आरती।
ॐ जय गंगे माता आरती
ॐ जय गंगे माता आरती का पूरा पाठ हिंदी में। गंगा दशहरा और संध्या गंगा-आरती में गाई जाने वाली माँ गंगा की आरती।
जय जय तुलसी माता आरती
जय जय तुलसी माता आरती का पूरा पाठ हिंदी में। कार्तिक मास और तुलसी विवाह पर गाई जाने वाली तुलसी माता की आरती।
श्री कुबेर आरती – ॐ जय यक्ष कुबेर हरे
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे – भगवान कुबेर की आरती का पूरा पाठ हिंदी में। धनतेरस और दीपावली पूजन में गाई जाने वाली आरती।
शीश गंग अर्धंग पार्वती – शिव आरती
शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी – भगवान शिव की कैलाशवासी आरती का पूरा पाठ हिंदी में।
हर हर हर महादेव – शिव आरती
सत्य, सनातन, सुंदर, शिव सबके स्वामी – हर हर हर महादेव शिव आरती का पूरा पाठ हिंदी में।
कर्पूरगौरं – कर्पूर आरती
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् – शिव-पार्वती वंदना का कर्पूर आरती श्लोक, संस्कृत में।
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं – बांके बिहारी जी की आरती का पूरा पाठ हिंदी में।
श्री गिरिराज जी की आरती – ॐ जय जय जय गिरिराज
ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय गिरिराज – श्री गिरिराज गोवर्धन जी की आरती का पूरा पाठ, गोवर्धन पूजा हेतु।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की – श्री राम आरती
आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की – भगवान श्री राम की आरती का पूरा पाठ हिंदी में।
जय वैष्णवी माता – वैष्णो देवी आरती
जय वैष्णवी माता – माता वैष्णो देवी की आरती का पूरा पाठ हिंदी में। नवरात्रि, जागरण और दैनिक पूजा में गाई जाने वाली पारंपरिक आरती।
माँ महागौरी की आरती
माँ महागौरी की आरती "जय महागौरी जगत की माया" का पूरा पाठ हिंदी में। नवरात्रि की अष्टमी को महागौरी पूजन के बाद गाई जाने वाली आरती।
ॐ जय बृहस्पति देवा – बृहस्पति देव आरती
ॐ जय बृहस्पति देवा आरती का पूरा पाठ हिंदी में। गुरुवार व्रत और बृहस्पति देव की पूजा के बाद गाई जाने वाली पारंपरिक आरती।
जय भैरव देवा – भैरव आरती
जय भैरव देवा आरती का पूरा पाठ हिंदी में। भैरव अष्टमी और भैरव पूजन के अंत में गाई जाने वाली बटुक भैरव की पारंपरिक आरती।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा – विश्वकर्मा आरती
ॐ जय श्री विश्वकर्मा आरती का पूरा पाठ हिंदी में। विश्वकर्मा पूजा के दिन औजारों व कार्यस्थल की पूजा के बाद गाई जाने वाली आरती।
अभयदान दीजै दयालु प्रभु – शिव आरती
अभयदान दीजै दयालु प्रभु – भोलेनाथ की पारंपरिक शिव आरती, सावन, सोमवार और महाशिवरात्रि के लिए सम्पूर्ण पाठ।
ॐ जय गंगाधर – शिव आरती
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा – भगवान शिव की पारंपरिक संस्कृत आरती, महाशिवरात्रि व सावन के लिए सम्पूर्ण पाठ।
लवथवती विक्राळा – शंकराची आरती (मराठी)
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा – समर्थ रामदास रचित भगवान शंकर की मराठी आरती का सम्पूर्ण मूल पाठ।
आरती श्री नरसिंह भगवान की – ॐ जय नरसिंह हरे
ॐ जय नरसिंह हरे – भगवान नृसिंह की आरती का सम्पूर्ण पाठ, नृसिंह जयंती और पूजा के लिए।
श्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती – शेषाचल अवतार तारक तूं देवा
शेषाचल अवतार तारक तूं देवा – भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की पारंपरिक मराठी आरती का पाठ।
पढ़ें: श्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती – शेषाचल अवतार तारक तूं देवा
श्री गोवर्धन महाराज की आरती – तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ
श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ – गोवर्धन पूजा व अन्नकूट पर गाई जाने वाली गिरिराज जी की आरती।
पढ़ें: श्री गोवर्धन महाराज की आरती – तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ
श्री बालाजी की आरती – ॐ जय हनुमत वीरा
श्री बालाजी की आरती "ॐ जय हनुमत वीरा" का पूरा पाठ हिंदी में। हनुमान जी की यह आरती मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती पर गाई जाती है।
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी – विन्ध्येश्वरी आरती
माँ विन्ध्येश्वरी की आरती "सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी" का पूरा पाठ हिंदी में। नवरात्रि व देवी-पूजन में गाई जाने वाली लोकप्रिय आरती।
चिंतपूर्णी माता की आरती
चिंतपूर्णी माता की आरती "चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जग को तारो भोली माँ" का पूरा पाठ। नवरात्रि व देवी-पूजन में गाई जाने वाली आरती।
जय पार्वती माता – पार्वती आरती
माता पार्वती की आरती "जय पार्वती माता, ब्रह्मा सनातन देवी" का पूरा पाठ हिंदी में। तीज, गणगौर व गौरी पूजन में गाई जाने वाली आरती।
ॐ जय जगदानन्दी – नर्मदा माता आरती
माँ नर्मदा की आरती "ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी" का पूरा पाठ हिंदी में। नर्मदा जयंती व घाटों की संध्या आरती में गाई जाती है।
नवग्रह आरती
नवग्रह आरती "आरती श्री नवग्रहों की कीजै, बाध कष्ट रोग हर लीजै" का पूरा पाठ हिंदी में। नवग्रह पूजन व ग्रह-शांति में गाई जाती है।
चंद्र देव आरती – ॐ जय सोम देवा
चंद्र देव की आरती "ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा" का पूरा पाठ हिंदी में। पूर्णिमा व सोमवार को चन्द्र-पूजन में गाई जाती है।
जय धन्वन्तरि देवा – धन्वन्तरि आरती
जय धन्वन्तरि देवा – आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वन्तरि की आरती का पूरा पाठ, धनतेरस पूजा के लिए हिंदी में।
कार्तिकेय भगवान की आरती – जय जय आरती
जय जय आरती सुब्रह्मण्य, सुब्रह्मण्य कार्तिकेय – भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की आरती का पूरा पाठ हिंदी में।
त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती – दत्ताची आरती
त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा – संत एकनाथ रचित श्री दत्ताची मराठी आरती का पूरा पाठ देवनागरी में।
दुर्गे दुर्घट भारी – देवीची आरती
दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी – माँ दुर्गा की प्रसिद्ध मराठी आरती का पूरा पाठ देवनागरी में, नवरात्रि के लिए।
पितर जी की आरती – जय जय पितरजी महाराज
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूँ थारी – पितृ पक्ष और श्राद्ध में गाई जाने वाली पितर जी की आरती का पूरा पाठ।
अहोई माता की आरती
जय अहोई माता, तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता – अहोई अष्टमी पर गाई जाने वाली अहोई माता की पारंपरिक आरती का सम्पूर्ण पाठ।
गौ माता की आरती
आरती श्री गैया मैया की, आरती हरनि विश्व धैया की – गोपाष्टमी व गौ-पूजन पर गाई जाने वाली गौ माता की पारंपरिक आरती का सम्पूर्ण पाठ।
श्री सूर्य नारायण आरती – जय कश्यप नन्दन
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति-नन्दन – भगवान सूर्य नारायण की पारंपरिक आरती का सम्पूर्ण पाठ, रविवार व संक्रान्ति के सूर्य-पूजन के लिए।
चालीसा
श्री हनुमान चालीसा
श्री हनुमान चालीसा का पूरा पाठ – गोस्वामी तुलसीदास रचित, आरंभ और अंत के दोहों सहित चालीस चौपाइयाँ।
श्री चिंतपूर्णी चालीसा
श्री चिंतपूर्णी चालीसा "चित्त में बसो चिंतपूर्णी, छिन्नमस्तिका मात" का पूरा पाठ हिंदी में। नवरात्रि व देवी-पूजा में पढ़ा जाने वाला चालीसा।
श्री नैना देवी चालीसा
श्री नैना देवी चालीसा "नमस्कार हैं नैना माता" का पूरा पाठ हिंदी में, दोहा व चौपाई सहित। नवरात्रि व देवी-पूजा में पढ़ा जाने वाला चालीसा।
श्री शारदा चालीसा
श्री शारदा चालीसा "जय जय जय शारदा महारानी" का पूरा पाठ हिंदी में। मैहर वाली माँ शारदा का चालीसा, नवरात्रि व वसंत पंचमी पर पढ़ा जाता है।
श्री गिरिराज चालीसा
श्री गिरिराज चालीसा "जय हो जय बंदित गिरिराजा" का पूरा पाठ। गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और गिरिराज परिक्रमा पर पढ़ा जाने वाला चालीसा।
श्री बांके बिहारी चालीसा
श्री बांके बिहारी चालीसा (विनय पचासा) "जै जै जै श्री बाँकेबिहारी" का पूरा पाठ। बिहार पंचमी व जन्माष्टमी पर पढ़ा जाने वाला चालीसा।
श्री पितर चालीसा
श्री पितर चालीसा – "हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद" से आरम्भ, पूर्वजों की स्तुति। पितृ पक्ष के लिए दोहा-चौपाई सहित सम्पूर्ण पाठ।
श्री गोरखनाथ चालीसा
श्री गोरखनाथ (गोरक्ष) चालीसा – "गणपति गिरिजा पुत्र को" से आरम्भ, नाथ योगी गुरु गोरखनाथ की स्तुति। दोहा-चौपाई सहित सम्पूर्ण पाठ।
स्तोत्र
आदित्यहृदय स्तोत्रम्
आदित्यहृदय स्तोत्रम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ — वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड में अगस्त्य मुनि द्वारा श्रीराम को उपदिष्ट सूर्य स्तुति, ३१ श्लोक।
भज गोविन्दम् (मोहमुद्गर)
भज गोविन्दम् (मोहमुद्गर) का संपूर्ण संस्कृत पाठ — आदि शंकराचार्य से जुड़ी रचना, "भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते"।
दशावतार स्तोत्र (प्रलयपयोधिजले)
जयदेव रचित दशावतार स्तोत्र "प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम्" का संपूर्ण संस्कृत पाठ — गीतगोविन्द, प्रथम सर्ग; विष्णु के दस अवतारों की स्तुति।
श्री गणपति अथर्वशीर्ष
श्री गणपति अथर्वशीर्ष का संपूर्ण संस्कृत पाठ — शान्ति पाठ, "ॐ नमस्ते गणपतये", गणेश विद्या, गणेश गायत्री और फलश्रुति सहित।
नमामि भक्त वत्सलं – अत्रि मुनि कृत श्रीराम स्तुति
नमामि भक्त वत्सलं – श्रीरामचरितमानस अरण्यकाण्ड में अत्रि मुनि द्वारा की गई श्रीराम स्तुति के बारह छंद।
रात्रि सूक्तम्
रात्रि सूक्तम् – ऋग्वेद का वैदिक रात्रि सूक्त और दुर्गा सप्तशती का तन्त्रोक्त रात्रि सूक्त, पूरा संस्कृत पाठ।
सप्तश्लोकी दुर्गा
सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पूरा संस्कृत पाठ – शिव-देवी संवाद, विनियोग और सात श्लोक।
दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला
दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला - माँ दुर्गा के 32 नामों का पूरा संस्कृत पाठ, जो दुर्गा सप्तशती के परिशिष्ट पाठों में सम्मिलित है।
श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् (ॐ सती साध्वी भवप्रीता) का पूरा संस्कृत पाठ - विश्वसार तन्त्र से माँ दुर्गा के 108 नाम।
नवदुर्गा स्तोत्र
नवदुर्गा स्तोत्र – शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के ध्यान-श्लोक (वन्दे वाञ्छितलाभाय…), पूरा संस्कृत पाठ।
श्री ललिता सहस्रनाम स्तोत्रम्
श्री ललिता सहस्रनाम स्तोत्रम् – न्यास, ध्यान और देवी ललिता के एक हज़ार नामों वाले पूरे १८२½ श्लोक, संस्कृत मूल पाठ (ब्रह्माण्ड पुराण)।
सौन्दर्यलहरी
आदि शंकराचार्य रचित सौन्दर्यलहरी – देवी त्रिपुरसुन्दरी की स्तुति के पूरे १०० श्लोक (आनन्दलहरी सहित), संस्कृत मूल पाठ, श्लोक-क्रमांक के साथ।
महालक्ष्म्यष्टकम् (नमस्तेऽस्तु महामाये)
महालक्ष्म्यष्टकम् (नमस्तेऽस्तु महामाये) – महालक्ष्मी स्तुति का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, फलश्रुति सहित। परम्परा में इसे देवराज इन्द्र द्वारा कहा गया माना जाता है।
श्री रुद्रम् – चमकम् (चमकप्रश्न)
श्री रुद्रम् चमकम् – कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय संहिता 4.7 का सम्पूर्ण चमकप्रश्न, ग्यारह अनुवाक, बिना स्वर-चिह्नों के संस्कृत पाठ।
मयूरेश स्तोत्रम्
मयूरेश स्तोत्रम् – पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा। गणेश स्तुति का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ। इसे गणेश पुराण से जुड़ा और ब्रह्मा जी द्वारा कहा गया माना जाता है।
पुरुष सूक्तम् (ऋग्वेद १०.९०)
ऋग्वेद मण्डल १० सूक्त ९० – पुरुष सूक्तम् का सम्पूर्ण मूल पाठ: सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्, सोलह मंत्रों सहित।
नारायण सूक्तम्
तैत्तिरीय आरण्यक का नारायण सूक्तम् – सहस्रशीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशम्भुवम्, शान्ति पाठ और नारायण गायत्री सहित सम्पूर्ण पाठ।
श्री विष्णु षट्पदी स्तोत्रम्
आदि शंकराचार्य रचित श्री विष्णु षट्पदी स्तोत्रम् – अविनयमपनय विष्णो दमय मनः, सात श्लोकों का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
दामोदराष्टकम्
परम्परा के अनुसार पद्मपुराण का दामोदराष्टकम् – नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं, कार्तिक मास में गाया जाने वाला सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, आठ श्लोक।
बालमुकुन्दाष्टकम्
बालमुकुन्दाष्टकम् — "करारविन्देन पदारविन्दं" से आरम्भ होने वाले बालकृष्ण की स्तुति के आठ संस्कृत श्लोक, पूर्ण पाठ।
दशरथ कृत शनि स्तोत्र
दशरथ कृत शनि स्तोत्र — पद्मपुराण में वर्णित "नमः कृष्णाय नीलाय" से आरम्भ होने वाली शनि देव की स्तुति, पूर्ण संस्कृत पाठ।
शनि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
शनि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् — "शनैश्चराय शान्ताय" से आरम्भ, शनि देव के 108 नामों वाला संस्कृत स्तोत्र, पूर्ण पाठ।
गुर्वष्टकम्
गुर्वष्टकम् (आदि शंकराचार्य) — "शरीरं सुरूपं तथा वा कलत्रं" से आरम्भ, गुरु-चरणों की महिमा के श्लोक, पूर्ण संस्कृत पाठ।
हनुमान साठिका
हनुमान साठिका – 'जय जय जय हनुमान अडंगी' से आरम्भ होने वाली साठ चौपाइयों की स्तुति, दोहा और सवैया सहित सम्पूर्ण पाठ।
श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र
श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र – परम्परा के अनुसार विभीषणकृत हनुमद्वडवानल स्तोत्रम् का विनियोग और ध्यान सहित सम्पूर्ण संस्कृत मूल पाठ।
श्री हनुमान द्वादश नाम स्तोत्र
श्री हनुमान द्वादश नाम स्तोत्र – 'हनुमानञ्जनासूनुः वायुपुत्रो महाबलः' हनुमान जी के बारह नामों का संस्कृत स्तोत्र, सम्पूर्ण मूल पाठ।
आपदुद्धारक हनुमत् स्तोत्रम्
आपदुद्धारक हनुमत् स्तोत्रम् – 'आपन्नाखिललोकार्तिहारिणे श्रीहनूमते' परम्परा में विभीषण की रचना माना जाने वाला हनुमान स्तोत्र, विनियोग, ध्यान और मन्त्र सहित सम्पूर्ण पाठ।
जय राम रमारमनं समनं – शिव कृत राम स्तुति
जय राम रमारमनं समनं – रामचरितमानस उत्तरकाण्ड की शिव कृत राम स्तुति, दस छंद और दोहा सहित सम्पूर्ण मूल पाठ।
जय जय सुरनायक – देव कृत स्तुति
जय जय सुरनायक जन सुखदायक – रामचरितमानस बालकाण्ड की देव कृत भगवान विष्णु स्तुति, चार छंद और दोहा सहित मूल पाठ।
श्री राम वन्दना – मानस मंगलाचरण श्लोक
श्री राम वन्दना – 'वर्णानामर्थसंघानां' से आरम्भ रामचरितमानस बालकाण्ड के सात मंगलाचरण श्लोक, सम्पूर्ण संस्कृत मूल पाठ।
माँ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र
माँ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र – तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्; नवरात्रि के दूसरे दिन पढ़ा जाने वाला सम्पूर्ण पाठ।
माँ कूष्माण्डा स्तोत्र
माँ कूष्माण्डा स्तोत्र – दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्; नवरात्रि के चौथे दिन का सम्पूर्ण पाठ।
माँ महागौरी स्तोत्र
माँ महागौरी स्तोत्र – नवरात्रि की अष्टमी पर पढ़ा जाने वाला नवदुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी का पारंपरिक स्तोत्र, सम्पूर्ण मूल पाठ।
माँ सिद्धिदात्री स्तोत्र
माँ सिद्धिदात्री स्तोत्र – नवरात्रि की नवमी पर पढ़ा जाने वाला नवदुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री का पारंपरिक स्तोत्र, सम्पूर्ण मूल पाठ।
श्री ललिता त्रिशती स्तोत्रम्
श्री ललिता त्रिशती स्तोत्रम् – हयग्रीव–अगस्त्य संवाद में देवी ललिता के तीन सौ नाम; ध्यान सहित सम्पूर्ण ५९ श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ।
देवी भुजङ्ग स्तोत्रम्
देवी भुजङ्ग स्तोत्रम् – भगवती त्रिपुरसुन्दरी की भुजङ्गप्रयात छन्द में स्तुति, सम्पूर्ण २८ श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ। परम्परा में इसे आदि शङ्कराचार्य की रचना माना जाता है।
आनन्दलहरी
आनन्दलहरी – भगवती पार्वती की शिखरिणी छन्द में स्तुति "भवानि स्तोतुं त्वां", सम्पूर्ण २० श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ। परम्परा में इसे आदि शङ्कराचार्य की रचना माना जाता है।
श्री विन्ध्यवासिनी (विन्ध्येश्वरी) स्तोत्रम्
श्री विन्ध्यवासिनी (विन्ध्येश्वरी) स्तोत्रम् – "भजामि विन्ध्यवासिनीम्", माँ विन्ध्यवासिनी का पारंपरिक स्तोत्र, सम्पूर्ण आठ श्लोकों का मूल पाठ।
आद्या स्तोत्रम्
आद्या स्तोत्रम् – समापन-पंक्ति के अनुसार ब्रह्मयामल के ब्रह्मा–नारद संवाद से माँ आद्या काली की स्तुति "शृणु वत्स प्रवक्ष्यामि", सम्पूर्ण २० श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ।
कमला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
कमला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – "शतमष्टोत्तरं नाम्नां कमलाया वरानने" शिव द्वारा कहे गए देवी कमला के 108 नाम, सम्पूर्ण मूल पाठ।
उमा महेश्वर स्तोत्रम्
उमा महेश्वर स्तोत्रम् – "नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां" से शुरू होने वाली शिव-पार्वती की संयुक्त स्तुति, जिसे आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है। सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
गायत्री स्तोत्रम् (देवी भागवत)
गायत्री स्तोत्रम् – श्रीमद्देवीभागवत (12.5) में नारायण द्वारा कहा गया "आदिशक्ते जगन्मातः" सन्ध्या-गायत्री स्तोत्र, सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
गायत्री हृदयम्
गायत्री हृदयम् – श्रीमद्देवीभागवत पुराण (12.4) में नारायण द्वारा नारद को उपदिष्ट वेदमाता गायत्री का हृदय, न्यास सहित सम्पूर्ण पाठ।
मणिकर्णिकाष्टकम्
त्वत्तीरे मणिकर्णिके हरिहरौ – समापन-पंक्ति के अनुसार आदि शंकराचार्य रचित मणिकर्णिकाष्टकम् का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ, ९ श्लोक।
सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
सरस्वती महाभद्रा महामाया वरप्रदा – माँ सरस्वती के १०८ नामों वाला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्, सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
काशी विश्वनाथाष्टकम्
गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं – वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्, काशी विश्वनाथाष्टकम् का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
वैद्यनाथाष्टकम्
वैद्यनाथाष्टकम् संस्कृत में – "श्रीरामसौमित्रिजटायुवेद" से आरम्भ, भगवान शिव के वैद्यनाथ स्वरूप की स्तुति, शम्भो महादेव कीर्तन सहित पाठ। दोहराया गया कीर्तन संक्षेप में दिया गया है।
शिव मङ्गलाष्टकम्
शिव मङ्गलाष्टकम् संस्कृत में – "भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने" से आरम्भ, भगवान शिव का मङ्गल-पाठ, पूरा पाठ।
शिवानन्दलहरी
शिवानन्दलहरी संस्कृत में – आदि शङ्कराचार्य कृत भगवान शिव की सौ श्लोकों की स्तुति, "कलाभ्यां चूडालङ्कृत" से आरम्भ, सम्पूर्ण पाठ।
शिव भुजङ्ग स्तोत्रम् (शिवभुजङ्गम्)
शिव भुजङ्ग स्तोत्रम् संस्कृत में – आदि शङ्कराचार्य कृत, "गलद्दानगण्डं मिलद्भृङ्गषण्डं" से आरम्भ, चालीस श्लोकों का सम्पूर्ण पाठ।
शिव नामावल्यष्टकम् (हे चन्द्रचूड मदनान्तक)
शिव नामावल्यष्टकम् संस्कृत में – आदि शङ्कराचार्य के नाम से प्रचलित, "हे चन्द्रचूड मदनान्तक शूलपाणे" से आरम्भ, सम्पूर्ण पाठ।
काशी पञ्चकम्
काशी पञ्चकम् संस्कृत में – आदि शङ्कराचार्य कृत, "मनोनिवृत्तिः परमोपशान्तिः" से आरम्भ, पाँच श्लोकों का सम्पूर्ण पाठ।
शिव अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
शिव अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् संस्कृत में – "शिवो महेश्वरः शम्भुः पिनाकी शशिशेखरः" से आरम्भ, भगवान शिव के 108 नामों का श्लोकबद्ध पाठ।
शिव सुवर्णमाला स्तुतिः
आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित शिव सुवर्णमाला स्तुति – "साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर" टेक वाले ५० संस्कृत श्लोकों का सम्पूर्ण मूल पाठ।
गणेश मानस पूजा
मुद्गल पुराण की गृत्समद कृत गणेश मानस पूजा – मन से की जाने वाली गणेश जी की सम्पूर्ण पूजा के ८८ संस्कृत श्लोकों का मूल पाठ।
संतान गणपति स्तोत्रम्
संतान गणपति स्तोत्रम् – "नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च" से आरम्भ होने वाले ६ संस्कृत श्लोकों का सम्पूर्ण मूल पाठ।
गणेश अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
गणेश अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – "विनायको विघ्नराजो गौरीपुत्रो गणेश्वरः" से आरम्भ, भगवान गणेश के १०८ नामों का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
मुकुन्दमाला स्तोत्रम्
राजा कुलशेखर रचित मुकुन्दमाला स्तोत्रम् – "श्रीवल्लभेति वरदेति दयापरेति" सहित भगवान विष्णु की स्तुति के ४० संस्कृत श्लोकों का मूल पाठ।
विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – "विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो देवदेवो वृषाकपिः" सहित भगवान विष्णु के १०८ नामों का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
जगन्नाथाष्टकम्
आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित जगन्नाथाष्टकम् – "कदाचित्कालिन्दीतटविपिन…" और "जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे" टेक वाले ८ श्लोकों का मूल पाठ।
पाण्डुरङ्गाष्टकम्
आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित पाण्डुरङ्गाष्टकम् – "महायोगपीठे तटे भीमरथ्या" से आरम्भ, भगवान विट्ठल की स्तुति के ८ श्लोक और फलश्रुति का मूल पाठ।
श्री सत्यनारायण अष्टकम्
श्री सत्यनारायण अष्टकम् – 'आदिदेवं जगत्कारणं श्रीधरं' से आरंभ होने वाला भगवान सत्यनारायण का संस्कृत अष्टक, सम्पूर्ण पाठ।
श्री वामन स्तोत्र (अदिति कृत – श्रीमद्भागवत)
श्री वामन स्तोत्र – श्रीमद्भागवत (8.17.8-10) में देवमाता अदिति द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति 'यज्ञेश यज्ञपुरुषाच्युत तीर्थपाद', संस्कृत पाठ।
नृसिंह अष्टकम्
नृसिंह अष्टकम् – 'श्रीमदकलङ्क परिपूर्ण शशिकोटि' से आरंभ होने वाला भगवान नृसिंह का संस्कृत अष्टक, फलश्रुति सहित सम्पूर्ण पाठ।
कृष्ण द्वादश नाम स्तोत्रम्
कृष्ण द्वादश नाम स्तोत्रम् – 'किं ते नामसहस्रेण विज्ञातेन तवार्जुन', भगवान कृष्ण के बारह नाम, सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
गीता ध्यानम्
गीता ध्यानम् के नौ श्लोक संस्कृत में — ॐ पार्थाय प्रतिबोधितां से आरम्भ, गीता-पाठ से पहले किया जाने वाला मंगलाचरण।
श्री युगलाष्टकम् (कृष्णप्रेममयी राधा)
श्री युगलाष्टकम् — कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः, राधा-कृष्ण की स्तुति के आठ श्लोक संस्कृत में।
श्री राधाष्टकम्
श्री राधाष्टकम् — नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै, श्री निम्बार्काचार्य के नाम से प्रचलित राधा रानी की स्तुति का संपूर्ण संस्कृत पाठ।
श्री गोवर्धनाष्टकम्
श्री गोवर्धनाष्टकम् — श्री रूप गोस्वामी रचित गिरिराज गोवर्धन की स्तुति, संपूर्ण संस्कृत पाठ श्लोक संख्या सहित।
केतु स्तोत्रम्
केतु स्तोत्रम् — केतु के बारह नाम और पूजन-विधि वाला संस्कृत स्तोत्र, विनियोग सहित संपूर्ण पाठ।
नवग्रह सूक्तम्
नवग्रह सूक्तम् – सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु को समर्पित वैदिक मन्त्र, संस्कृत मूल पाठ।
सूर्य सूक्तम्
सूर्य सूक्तम् (ऋग्वेद 1.115, चित्रं देवानामुदगादनीकम्) – ऋषि कुत्स आङ्गिरस का सूर्य देवता को समर्पित वैदिक सूक्त, संस्कृत मूल पाठ।
चन्द्र अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
चन्द्र अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – नवग्रह चन्द्र देव के 108 नामों का संस्कृत स्तोत्र (श्रीमान् शशधरश्चन्द्रो), सम्पूर्ण मूल पाठ।
केतु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
केतु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – छाया ग्रह केतु के 108 नामों का संस्कृत स्तोत्र (शृणु नामानि जप्यानि), सम्पूर्ण मूल पाठ।
घोरकष्टोद्धरण स्तोत्रम्
घोरकष्टोद्धरण स्तोत्रम् (श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वं सदैव) — श्री वासुदेवानन्द सरस्वती रचित दत्तात्रेय प्रार्थना, सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
धन्वन्तरि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
धन्वन्तरि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् — "धन्वन्तरिः सुधापूर्णकलशाढ्यकरो हरिः" से आरम्भ, भगवान धन्वन्तरि के १०८ नामों का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
पितृ सूक्तम् (ऋग्वेद १०.१५)
पितृ सूक्तम् — ऋग्वेद मण्डल १० सूक्त १५ ("उदीरतामवर उत्परास"), पितरों के आवाहन के १४ मंत्र, श्राद्ध व पितृ पक्ष हेतु सम्पूर्ण पाठ।
पृथ्वी सूक्तम् (भूमि सूक्त)
पृथ्वी सूक्त (भूमि सूक्त) – अथर्ववेद काण्ड १२ सूक्त १ के सभी ६३ मन्त्र संस्कृत में, "माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः" सहित पूरा पाठ।
मनीषा पञ्चकम्
मनीषा पञ्चकम् संस्कृत में – आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित, काशी में चाण्डाल-प्रसंग के प्रारम्भिक श्लोकों और "इत्येषा मनीषा मम" वाले पाँचों श्लोकों सहित पूरा पाठ।
साधना पञ्चकम्
साधना पञ्चकम् (उपदेश पञ्चकम्) संस्कृत में – आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित "वेदो नित्यमधीयताम्" से आरम्भ होने वाले पाँचों श्लोक, पूरा पाठ।
दशश्लोकी
दशश्लोकी (निर्वाण दशकम्) संस्कृत में – आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित "न भूमिर्न तोयं" से आरम्भ, "शिवः केवलोऽहम्" टेक वाले दसों श्लोक, पूरा पाठ।
प्रातः स्मरण स्तोत्रम् (शङ्कराचार्य)
प्रातः स्मरण स्तोत्रम् संस्कृत में – आदि शंकराचार्य के नाम से प्रचलित "प्रातः स्मरामि हृदि संस्फुरदात्मतत्त्वं" आदि तीन श्लोक और फलश्रुति, पूरा पाठ।
श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् "आञ्जनेयो महावीरो हनुमान्मारुतात्मजः" – हनुमान जी के १०८ नाम, २२ श्लोकों का पूरा संस्कृत पाठ।
श्री राम पञ्चरत्न स्तोत्रम्
श्री राम पञ्चरत्न स्तोत्रम् "कञ्जातपत्रायतलोचनाय" – नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय वाले पाँच श्लोक व फलश्रुति, पूरा संस्कृत पाठ।
श्री सोमनाथ स्तोत्रम् (कुबेरकृत)
कुबेरकृत श्री सोमनाथ स्तोत्रम् — स्कन्दपुराण प्रभासखण्ड अध्याय २९० से, "नमाम्यहं देवमजं पुराणम्..." शिव स्तुति का पूरा संस्कृत पाठ।
श्री गणपति गकार अष्टोत्तर शतनामावली
श्री गणपति गकार अष्टोत्तर शतनामावली — "ग" अक्षर से आरम्भ होने वाले भगवान गणेश के 108 नाम, पूजा और अर्चना के लिए पूरा संस्कृत पाठ।
श्री कृष्णलहरी स्तोत्रम्
श्री कृष्णलहरी स्तोत्रम् — वासुदेवानन्द सरस्वती रचित "कदा वृन्दारण्ये..." भगवान श्रीकृष्ण की आठ श्लोकों वाली संस्कृत स्तुति।
अष्टकम
मधुराष्टकम्
श्री वल्लभाचार्य रचित मधुराष्टकम् (अधरं मधुरं वदनं मधुरं) का संपूर्ण संस्कृत पाठ, जिसमें श्रीकृष्ण की माधुरी का वर्णन है।
अच्युताष्टकम्
आदि शंकराचार्य की रचना माने जाने वाले अच्युताष्टकम् (अच्युतं केशवं रामनारायणं) का संपूर्ण संस्कृत पाठ, फलश्रुति सहित।
श्री कृष्णाष्टकम्
श्री कृष्णाष्टकम् (वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ, आठ श्लोक और फलश्रुति सहित।
लिङ्गाष्टकम्
लिङ्गाष्टकम् (ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं) का संपूर्ण संस्कृत पाठ, आठ श्लोक और फलश्रुति सहित।
संकटमोचन हनुमानाष्टक
गोस्वामी तुलसीदास की रचना माने जाने वाले संकटमोचन हनुमानाष्टक (बाल समय रबि भक्षि लियो तब) का संपूर्ण पाठ, आठ पद और दोहा सहित।
गोविन्दाष्टकम्
आदि शंकराचार्य की रचना माने जाने वाले गोविन्दाष्टकम् (सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ, फलश्रुति सहित।
भवान्यष्टकम्
आदि शंकराचार्य की रचना माने जाने वाले भवान्यष्टकम् (न तातो न माता न बन्धुर्न दाता) का संपूर्ण संस्कृत पाठ।
श्री कृष्णाष्टकम् – भजे व्रजैकमण्डनं
श्री कृष्णाष्टकम् "भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं" — परंपरा में आदि शंकराचार्य की रचना माने जाने वाले इस अष्टक का पूरा संस्कृत पाठ, जन्माष्टमी व नित्य पूजा हेतु।
श्री नन्दनन्दनाष्टकम् (यशोदानन्दन अष्टक)
श्री नन्दनन्दनाष्टकम् – 'सुचारुवक्त्रमण्डलं' से आरंभ, 'नमामि नन्दनन्दनम्' टेक वाला बालकृष्ण का अष्टक, सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
श्री आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम्
श्री आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् – 'कपिश्रेष्ठाय शूराय' से आरंभ, 'आञ्जनेयाय मङ्गलम्' टेक वाला हनुमान जी का मंगल अष्टक, सम्पूर्ण संस्कृत पाठ।
श्री विष्णु अष्टकम् (विष्णुं विशालारुणपद्मनेत्रं)
श्री विष्णु अष्टकम् संस्कृत में – "विष्णुं विशालारुणपद्मनेत्रं" से आरम्भ, श्री नारायण गुरु रचित भगवान विष्णु की स्तुति के आठ श्लोक, पूरा पाठ।
श्री हरि अष्टकम् (हर्यष्टकम् – प्रह्लाद कृत)
श्री हरि अष्टकम् (हर्यष्टकम्) संस्कृत में – "हरिर्हरति पापानि" से आरम्भ, परंपरा में भक्त प्रह्लाद की रचना माने जाने वाले हरि-नाम महिमा के श्लोक, पूरा पाठ।
श्री दुर्गा अष्टकम्
श्री दुर्गा अष्टकम् (कात्यायनि महामाये) — माँ दुर्गा की स्तुति के आठ संस्कृत श्लोक, फलश्रुति सहित। नवरात्रि व दैनिक पूजा में पाठ हेतु।
श्री सरस्वती अष्टकम्
श्री सरस्वती अष्टकम् (अमला विश्ववन्द्या सा) — माँ सरस्वती की स्तुति के आठ संस्कृत श्लोक, फलश्रुति सहित। वसंत पंचमी पाठ हेतु।
श्री मीनाक्षी पञ्चरत्नम्
श्री मीनाक्षी पञ्चरत्नम् (उद्यद्भानुसहस्रकोटिसदृशां) — आदि शंकराचार्य रचित माँ मीनाक्षी की स्तुति के पाँच संस्कृत श्लोक।
श्री शनि अष्टकम्
श्री शनि अष्टकम् (परंपरा में राजा दशरथ की रचना माना जाने वाला शनैश्चर स्तोत्र) – “कोणोऽन्तको रौद्रयमोऽथ बभ्रुः” – संपूर्ण संस्कृत पाठ, विनियोग और शनि के दस नाम सहित।
श्री आदित्य अष्टकम्
श्री आदित्य अष्टकम् – “उदयाद्रिमस्तकमहामणिं” – सूर्य देव की शरणागति स्तुति का संपूर्ण संस्कृत पाठ, फलश्रुति सहित।
श्री षण्मुख अष्टकम्
श्री षण्मुख अष्टकम् (तिरुचेन्दूर षण्मुख स्तोत्र) – “भावयामि सिन्धुतीरवासिनं षडाननम्” – संपूर्ण संस्कृत पाठ।
कवच
नारायण कवच
नारायण कवच का संपूर्ण संस्कृत पाठ — श्रीमद्भागवत ६.८, विश्वरूप द्वारा इन्द्र को उपदिष्ट नारायण-वर्म, ४२ श्लोक, न्यास सहित।
सूर्य कवचम् (याज्ञवल्क्य कृत)
सूर्य कवचम् — "शृणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्" का पूरा संस्कृत पाठ, रविवार व सूर्य उपासना हेतु। परंपरा में इसे महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा कहा गया माना जाता है।
शनि वज्रपंजर कवचम्
शनि वज्रपंजर कवचम् — विनियोग, ध्यान सहित पूरा संस्कृत पाठ (ब्रह्माण्ड पुराण), शनिवार व शनि उपासना हेतु।
नवग्रह कवचम्
नवग्रह कवचम् — "शिरो मे पातु मार्ताण्डो" से आरम्भ, ग्रहयामल से लिया गया माना जाने वाला कवच; पूरा संस्कृत पाठ, नवग्रह पूजन व ग्रह-शांति हेतु।
सरस्वती कवचम् (ब्रह्मवैवर्त पुराण)
सरस्वती कवचम् (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड) — "ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः" का पूरा संस्कृत पाठ।
पञ्चमुखी हनुमत् कवचम्
पञ्चमुखी हनुमत् कवचम् (सुदर्शन संहिता से जुड़ा माना जाता है) — ध्यान, न्यास व मंत्र सहित पूरा संस्कृत पाठ, मंगलवार-शनिवार हनुमान पूजा हेतु।
श्री राम कवचम्
श्री राम कवचम् (आनंद रामायण, अगस्त्य-सुतीक्ष्ण संवाद) — ध्यान सहित पूरा संस्कृत पाठ, रामनवमी व राम उपासना हेतु।
राहु कवचम्
राहु कवचम् – “प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिनम्” – विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ।
केतु कवचम्
केतु कवचम् – “केतुं करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम्” – विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्माण्ड पुराण से लिया गया बताता है।
चन्द्र कवचम्
चन्द्र कवचम् – “समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम्” – गौतम ऋषि विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ।
मंगल कवचम्
मंगल कवचम् (अंगारक कवच) – “रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी” – विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे मार्कण्डेय पुराण से लिया गया बताता है।
बुध कवचम्
बुध कवचम् संस्कृत में – "बुधस्तु पुस्तकधरः" से आरम्भ, बुध देव का कवच, विनियोग सहित सम्पूर्ण पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्मवैवर्त पुराण का अंश बताता है।
बृहस्पति कवचम्
बृहस्पति कवचम् (गुरु कवच) संस्कृत में – देवगुरु बृहस्पति का कवच, "अभीष्टफलदं देवं" ध्यान सहित सम्पूर्ण पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्मयामल से लिया गया बताता है।
शुक्र कवचम्
शुक्र कवचम् संस्कृत में – भार्गव शुक्राचार्य का कवच, "मृणालकुन्देन्दु" ध्यान और विनियोग सहित सम्पूर्ण पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्माण्ड पुराण का अंश बताता है।
श्री गोपाल कवचम्
श्री गोपाल कवचम् संस्कृत में – शिव-पार्वती संवाद रूप बालकृष्ण का कवच, "अथ वक्ष्यामि कवचं गोपालस्य" से सम्पूर्ण पाठ। पाठ के समापन-वाक्य के अनुसार यह नारद पञ्चरात्र का अंश है।
बटुक भैरव कवचम्
बटुक भैरव कवचम् संस्कृत में – "ॐ सहस्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरुः" से आरम्भ, विनियोग सहित सम्पूर्ण पाठ। इसे भैरव तन्त्र से लिया गया बताया जाता है।
माँ कूष्माण्डा कवच
माँ कूष्माण्डा कवच संस्कृत में – "हंसरै में शिर पातु" से आरम्भ, नवरात्रि के चौथे दिन पढ़ा जाने वाला नवदुर्गा कवच, सम्पूर्ण पाठ।
माँ कात्यायनी कवच
माँ कात्यायनी कवच संस्कृत में – "कात्यायनौमुख पातु" से आरम्भ, नवरात्रि के छठे दिन पढ़ा जाने वाला नवदुर्गा कवच, सम्पूर्ण पाठ।
काली कवचम् (त्रैलोक्य विजय)
काली कवचम् (त्रैलोक्य विजय) का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ — महानिर्वाणतन्त्र (सप्तम उल्लास) में सदाशिव द्वारा कहा गया आद्या काली का कवच।
स्कन्द कवचम् (स्कन्दाक्षय कवच)
स्कन्द कवचम् (स्कन्दाक्षय / कार्तिकेयाक्षय कवच) का संस्कृत पाठ — भगवान कार्तिकेय का कवच, जिसे उमायामल के देवकी-नारद संवाद से लिया गया माना जाता है।
श्री तुलसी कवचम् (ब्रह्माण्ड पुराण)
श्री तुलसी कवचम् – ब्रह्माण्ड पुराण के तुलसी-माहात्म्य से संपूर्ण संस्कृत पाठ, विनियोग सहित, तुलसी पूजन और कार्तिक मास के लिए।
मंत्र
गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र का शुद्ध संस्कृत पाठ – ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं। स्रोत: ऋग्वेद ३.६२.१० तथा शुक्ल यजुर्वेद ३६.३।
महामृत्युंजय मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र का शुद्ध संस्कृत पाठ – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे। स्रोत: ऋग्वेद ७.५९.१२ तथा शुक्ल यजुर्वेद ३.६०।
शिव मंत्र – ॐ नमः शिवाय एवं प्रमुख शिव मंत्र
शिव मंत्र संग्रह – ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12), रुद्र गायत्री और ईशान मंत्र, मूल वैदिक-पौराणिक पाठ सहित।
हनुमान मंत्र
हनुमान मंत्र संग्रह – हनुमान गायत्री, अञ्जनानन्दनं वीरं, मनोजवं मारुततुल्यवेगं (रामरक्षा) और अतुलितबलधामं (सुन्दरकाण्ड) श्लोक।
श्री कृष्ण मंत्र – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
श्री कृष्ण मंत्र संग्रह – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, कृष्णाय वासुदेवाय (भागवत 10.73.16), वसुदेवसुतं देवं और हरे कृष्ण महामंत्र।
विष्णु मंत्र
विष्णु मंत्र संग्रह – ॐ नमो नारायणाय, विष्णु गायत्री, ऋग्वेद 1.22.17 "इदं विष्णुर्वि चक्रमे" और शान्ताकारं भुजगशयनं ध्यान मंत्र।
राम तारक मंत्र
राम तारक मंत्र "श्री राम जय राम जय जय राम", षडक्षर राम मंत्र और श्रीरामरक्षास्तोत्र के प्रसिद्ध राम मंत्र – शुद्ध संस्कृत पाठ।
लक्ष्मी मंत्र
महालक्ष्मी के मंत्र – ॐ श्रीं श्रियै नमः, महालक्ष्मी गायत्री, श्रीसूक्त की प्रथम ऋचा और महालक्ष्म्यष्टक का श्लोक, शुद्ध संस्कृत पाठ।
सरस्वती मंत्र
माँ सरस्वती के मंत्र – ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः, ऋग्वेद का पावका नः सरस्वती, या कुन्देन्दु वंदना और विद्यारम्भ मंत्र, शुद्ध पाठ।
काली मंत्र
माँ काली के मंत्र – ॐ क्रीं, ॐ क्रीं कालिकायै नमः, दक्षिणकाली मंत्र, जयन्ती मङ्गला काली श्लोक और महाकाली ध्यान, शुद्ध पाठ।
नवार्ण मंत्र
नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे – दुर्गा सप्तशती विधि के अनुसार विनियोग, महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती ध्यान और जप-समर्पण।
सूर्य मंत्र
सूर्य देव के मंत्र – वैदिक मंत्र ॐ आ कृष्णेन रजसा, जपाकुसुमसङ्काशं, पीडाहर मंत्र, ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः और ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
चंद्र मंत्र
चन्द्र देव के मंत्र – वैदिक मंत्र ॐ इमं देवा असपत्नं, दधिशङ्खतुषाराभं, पीडाहर मंत्र, ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः और ॐ सों सोमाय नमः।
बुध मंत्र
बुध ग्रह के मंत्र – वैदिक मंत्र ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने, प्रियङ्गुकलिकाश्यामं, पीडाहर मंत्र, ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः और ॐ बुं बुधाय नमः।
गुरु (बृहस्पति) मंत्र
गुरु बृहस्पति के मंत्र – वैदिक मंत्र ॐ बृहस्पते अति यदर्यो, देवानां च ऋषीणां च, पीडाहर मंत्र, ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः और ॐ बृं बृहस्पतये नमः।
शुक्र मंत्र
शुक्र ग्रह के मंत्र – शुक्ल यजुर्वेद का वैदिक मंत्र, नवग्रह स्तोत्र का पौराणिक श्लोक, तांत्रिक बीज मंत्र और एकाक्षरी मंत्र संस्कृत में।
शनि मंत्र
शनि देव के मंत्र – शुक्ल यजुर्वेद का ‘शं नो देवीः’ वैदिक मंत्र, नीलाञ्जनसमाभासं पौराणिक श्लोक, तांत्रिक और एकाक्षरी बीज मंत्र।
राहु मंत्र
राहु ग्रह के मंत्र – शुक्ल यजुर्वेद का ‘कया नश्चित्र’ वैदिक मंत्र, अर्धकायं महावीर्यं पौराणिक श्लोक, तांत्रिक और एकाक्षरी बीज मंत्र।
केतु मंत्र
केतु ग्रह के मंत्र – शुक्ल यजुर्वेद का ‘केतुं कृण्वन्’ वैदिक मंत्र, पलाशपुष्पसङ्काशं पौराणिक श्लोक, तांत्रिक और एकाक्षरी बीज मंत्र।
गणेश गायत्री मंत्र
गणेश गायत्री मंत्र – तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि सहित वेद, गणपत्यथर्वशीर्ष और अग्निपुराण में मिलने वाले गणेश गायत्री के चार रूप।
शिव (रुद्र) गायत्री मंत्र
शिव (रुद्र) गायत्री मंत्र – तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्, तैत्तिरीय आरण्यक और मैत्रायणी संहिता से मूल पाठ।
विष्णु गायत्री मंत्र
विष्णु गायत्री मंत्र – नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्, महानारायणोपनिषद् से मूल संस्कृत पाठ।
लक्ष्मी गायत्री मंत्र
लक्ष्मी गायत्री मंत्र – महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्, श्रीसूक्त से मूल पाठ।
हनुमान गायत्री मंत्र
हनुमान गायत्री मंत्र – ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तथा ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि, मूल संस्कृत पाठ।
सूर्य गायत्री मंत्र
सूर्य गायत्री मंत्र – आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तथा भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि, मूल संस्कृत पाठ।
कृष्ण गायत्री मंत्र
कृष्ण गायत्री मंत्र – ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि, साथ में दामोदर गायत्री और गोपाल गायत्री, शुद्ध संस्कृत पाठ।
दुर्गा गायत्री मंत्र
दुर्गा गायत्री मंत्र – महानारायणोपनिषत् का कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि, महाशूलिनी गायत्री और गिरिजा गायत्री, शुद्ध पाठ।
राम गायत्री मंत्र
राम गायत्री मंत्र – ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्, तथा भरताग्रज-रघुनन्दन गायत्री, शुद्ध संस्कृत पाठ।
नवग्रह गायत्री मंत्र
नवग्रह गायत्री मंत्र – सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु के गायत्री मंत्र संस्कृत में, शुद्ध पाठ।
हरे कृष्ण महामंत्र
हरे कृष्ण महामंत्र – हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे; कलिसन्तरण उपनिषद् का मूल पाठ।
काल भैरव मंत्र
काल भैरव मंत्र – ॐ कालभैरवाय नमः, तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय श्लोक, ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय मूल मंत्र और बटुक भैरव गायत्री।
गंगा स्नान मंत्र
गंगा स्नान मंत्र – विष्णुपादाब्जसम्भूते गङ्गे, गंगा के द्वादश नाम (नन्दिनी नलिनी सीता) और गङ्गा गङ्गेति यो ब्रूयात् – मूल संस्कृत पाठ।
पितृ तर्पण मंत्र
पितृ तर्पण मंत्र – आयन्तु नः पितरः आवाहन, पिता-पितामह हेतु तर्पण वाक्य, आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं और येऽबान्धवा बान्धवा वा – मूल संस्कृत पाठ।
भजन
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई – मीराबाई का प्रसिद्ध कृष्ण-भक्ति पद, संपूर्ण मूल पाठ।
वैष्णव जन तो तेने कहिये
वैष्णव जन तो तेने कहिये – नरसिंह मेहता का प्रसिद्ध गुजराती भजन, मूल गुजराती लिपि में संपूर्ण पाठ।
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां – तुलसीदास
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां – तुलसीदास के नाम से प्रसिद्ध बाल-राम भजन, राम नवमी पर गाया जाने वाला सम्पूर्ण मूल पाठ।
ऐसो को उदार जग माहीं – तुलसीदास
ऐसो को उदार जग माहीं – तुलसीदास की विनय पत्रिका का पद, श्रीराम की उदारता का गुणगान। सम्पूर्ण मूल पाठ पढ़ें।
मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ – सूरदास
मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ – सूरदास का बाल-लीला पद, जिसमें कान्हा यशोदा से दाऊ की शिकायत करते हैं। सम्पूर्ण मूल पाठ पढ़ें।
प्रभु मोरे अवगुण चित न धरो (हमारे प्रभु औगुन चित न धरौ) – सूरदास
प्रभु मोरे अवगुण चित न धरो (हमारे प्रभु औगुन चित न धरौ) – सूरदास का प्रसिद्ध विनय पद, सम्पूर्ण मूल पाठ सहित।
पढ़ें: प्रभु मोरे अवगुण चित न धरो (हमारे प्रभु औगुन चित न धरौ) – सूरदास
मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी – सूरदास
मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी – सूरदास का बाल-कृष्ण पद, जिसमें कान्हा यशोदा से चोटी बढ़ने की बात पूछते हैं। सम्पूर्ण मूल पाठ।
जसोदा हरि पालनैं झुलावै – सूरदास
जसोदा हरि पालनैं झुलावै – सूरदास का लोरी पद, जिसमें यशोदा बालकृष्ण को पालने में झुलाती हैं। सम्पूर्ण मूल पाठ पढ़ें।
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे – मीराबाई
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे – मीराबाई का प्रसिद्ध कृष्ण-भक्ति पद, गिरिधर नागर के प्रति समर्पण। सम्पूर्ण मूल पाठ।
बसो मोरे नैनन में नंदलाल – मीराबाई
मीराबाई का भजन "बसो मोरे नैनन में नंदलाल" – श्रीकृष्ण के मोहक रूप का वर्णन करता पूरा पद, प्राचीन प्रकाशित संग्रहों से मिलाकर।
मैं तो प्रेम दिवानी – मीराबाई
मीराबाई का भजन "हेरी मैं तो प्रेम दिवाणी, मेरा दरद न जाणे कोय" – पूरा पद, कविता-कौमुदी और हरिऔध के संग्रह से मिलाकर।
हरि तुम हरो जन की भीर – मीराबाई
मीराबाई का भजन "हरि तुम हरो जन की भीर" – द्रौपदी, नरसिंह और गजराज प्रसंगों वाला पूरा पद, आश्रम भजनावली के पाठ से।
झीनी झीनी बीनी चदरिया – कबीर
संत कबीर का भजन "झीनी झीनी बीनी चदरिया" – पूरा पद, परमार्थ-सोपान, कबीर वचनावली और आश्रम भजनावली के पाठ से मिलाकर।
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी – संत रविदास
संत रविदास का भजन "अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी – प्रभु जी तुम चंदन हम पानी" – पूरा पद, आश्रम भजनावली एवं अन्य स्रोतों से मिलाकर।
मन पछितैहै अवसर बीते
तुलसीदास की विनय पत्रिका का पद "मन पछितैहै अवसर बीते" – पूरा मूल पाठ, दुर्लभ मानव देह पाकर हरि भजन की सीख।
कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो
तुलसीदास की विनय पत्रिका का पद "कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो" – संत-स्वभाव की कामना का पूरा मूल पाठ।
अब लौं नसानी अब न नसैहौं
तुलसीदास की विनय पत्रिका का पद "अब लौं नसानी, अब न नसैहौं" – राम-कृपा से नए संकल्प का पूरा मूल पाठ।
अबिगत गति कछु कहत न आवै
सूरदास का पद "अबिगत गति कछु कहत न आवै" – सूरसागर का आरंभिक पद, सगुण भक्ति का भाव, पूरा मूल पाठ।
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै
सूरदास का पद "मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै" – जहाज के पंछी की उपमा से अनन्य भक्ति का भाव, पूरा मूल पाठ।
नारायणनुं नाम ज लेतां – नरसी मेहता भजन
नरसी मेहता का गुजराती भजन "नारायणनुं नाम ज लेतां, वारे तेने तजिये रे" – पूरा पद देवनागरी लिपि में।
पसायदान – संत ज्ञानेश्वर
संत ज्ञानेश्वर का पसायदान "आतां विश्वात्मकें देवें" – ज्ञानेश्वरी अध्याय १८, ओवी १७९४–१८०२ का पूरा मराठी पाठ, देवनागरी में।
श्लोक
प्रातः स्मरण श्लोक
प्रातः स्मरण श्लोक – कराग्रे वसते लक्ष्मीः, समुद्रवसने देवि, ब्रह्मा मुरारि सहित सुबह पढ़े जाने वाले पाँच पारंपरिक संस्कृत श्लोक।
श्री गणेश श्लोक
श्री गणेश श्लोक – वक्रतुण्ड महाकाय, गजाननं भूतगणादिसेवितं, शुक्लाम्बरधरं, अगजानन पद्मार्कं और गणानां त्वा – संपूर्ण संस्कृत पाठ।
शिव श्लोक
शिव श्लोक – कर्पूरगौरं करुणावतारं, करचरणकृतं, महामृत्युंजय मन्त्र और नागेन्द्रहाराय – शिव पूजा हेतु संपूर्ण संस्कृत पाठ।
विष्णु श्लोक – शान्ताकारं भुजगशयनं
शान्ताकारं भुजगशयनं – विष्णुसहस्रनाम का प्रसिद्ध विष्णु ध्यान श्लोक, साथ में मेघश्यामं पीतकौशेयवासं श्लोक, संस्कृत में।
दुर्गा श्लोक – सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके – दुर्गा सप्तशती अध्याय ११ की नारायणी स्तुति के तीन प्रसिद्ध श्लोक, संस्कृत में।
सरस्वती श्लोक – विद्या प्राप्ति
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि और या कुन्देन्दुतुषारहारधवला – विद्यारंभ व सरस्वती पूजा के प्रसिद्ध श्लोक, संस्कृत में।
गुरु श्लोक – गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः – गुरुगीता के तीन प्रसिद्ध गुरु वंदना श्लोक, संस्कृत में।
हनुमान श्लोक – मनोजवं मारुततुल्यवेगं
मनोजवं मारुततुल्यवेगं और अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं – हनुमान जी के दो प्रसिद्ध वंदना श्लोक, संस्कृत में।
कृष्ण श्लोक – वसुदेवसुतं देवं
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् और कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने – श्रीकृष्ण के दो प्रसिद्ध वंदना श्लोक, संस्कृत में।
राम श्लोक – आपदामपहर्तारं
श्रीरामरक्षास्तोत्र से चुने गए प्रसिद्ध राम श्लोक – आपदामपहर्तारं, रामाय रामभद्राय, लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं सहित मूल संस्कृत पाठ।
लक्ष्मी श्लोक
माता महालक्ष्मी के प्रसिद्ध श्लोक – नमस्तेऽस्तु महामाये, सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि और या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण – मूल संस्कृत पाठ।
सूर्य श्लोक – जपाकुसुमसंकाशं
सूर्यदेव के प्रसिद्ध श्लोक – जपाकुसुमसंकाशं, आदिदेव नमस्तुभ्यं और ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती – मूल संस्कृत पाठ।
भोजन मंत्र – भोजन से पहले के श्लोक
भोजन से पहले बोले जाने वाले श्लोक – ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः, अहं वैश्वानरो भूत्वा, अन्नपूर्णे सदापूर्णे और ॐ सह नाववतु – मूल संस्कृत पाठ।
शान्ति मंत्र संग्रह – ॐ सह नाववतु, ॐ पूर्णमदः
वेद-उपनिषदों के शान्ति मंत्र – ॐ सह नाववतु, ॐ पूर्णमदः, ॐ भद्रं कर्णेभिः, असतो मा सद्गमय, द्यौः शान्तिः, सर्वे भवन्तु सुखिनः – मूल पाठ।
भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक
श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते, यदा यदा हि धर्मस्य, सर्वधर्मान्परित्यज्य सहित १३ श्लोक, अध्याय-श्लोक संख्या के साथ।
स्नान श्लोक – गङ्गे च यमुने चैव
स्नान श्लोक – गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति और पुष्कराद्यानि तीर्थानि – स्नान के समय पवित्र नदियों के आवाहन का मूल संस्कृत पाठ।
यात्रा श्लोक
यात्रा श्लोक – मङ्गलं भगवान् विष्णुः, सर्वदा सर्वकार्येषु, अग्रतः पृष्ठतश्चैव रामलक्ष्मणौ और वनमाली गदी शार्ङ्गी – यात्रा से पहले के संस्कृत श्लोक।
पृथ्वी वन्दना – समुद्रवसने देवि
पृथ्वी वन्दना – समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले प्रातः श्लोक और ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका आसन शुद्धि मंत्र, विनियोग सहित मूल संस्कृत पाठ।
शिव ध्यान श्लोक
शिव ध्यान श्लोक – ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं और रुद्र लघुन्यास का शुद्धस्फटिकसङ्काशं त्रिनेत्रं पञ्चवक्त्रकम् ध्यान – मूल संस्कृत पाठ।
पूजा आरम्भ श्लोक – पवित्रीकरण एवं आचमन
पूजा आरम्भ के श्लोक – ॐ अपवित्रः पवित्रो वा पवित्रीकरण मंत्र, ॐ केशवाय नमः आचमन मंत्र और हृषीकेशाय नमः हस्त-प्रक्षालन – संस्कृत पाठ।
गणेश ध्यान श्लोक
गणेश ध्यान श्लोक – एकदन्तं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम् सिद्धिविनायक ध्यान और बीजापूरगदेक्षुकार्मुक महागणपति ध्यान – मूल संस्कृत पाठ।
नामावली
श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
भगवान विष्णु के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री शिव अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
भगवान शिव के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
भगवान गणेश के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
श्री हनुमान के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
देवी लक्ष्मी के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
माँ दुर्गा के 108 नाम (सती, साध्वी, भवप्रीता…), हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
भगवान श्रीराम के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम, हर नाम का ॐ … नमः वाला मंत्र रूप और उसका सरल हिंदी अर्थ।
श्री बुध अष्टोत्तर शतनामावली
श्री बुध अष्टोत्तर शतनामावली – बुध देव के १०८ नाम, "ॐ बुधाय नमः" से आरम्भ। बुधवार की पूजा में पाठ हेतु पूर्ण संस्कृत पाठ।
श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनामावली
माँ सरस्वती के 108 नाम — श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, सरस्वती पूजन और वसंत पंचमी के लिए।
श्री राधा अष्टोत्तर शतनामावली
श्री राधा रानी के 108 नाम — श्री राधा अष्टोत्तर शतनामावली का संस्कृत पाठ, राधाष्टमी और राधा-कृष्ण पूजन के लिए।
श्री सीता अष्टोत्तर शतनामावली
माता सीता के 108 नाम — आनन्द रामायण पर आधारित श्री सीता अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, सीता नवमी और राम पूजन के लिए।
श्री तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली
तुलसी माता के 108 नाम — श्री तुलसी अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, तुलसी पूजन, कार्तिक मास और तुलसी विवाह के लिए।
श्री अन्नपूर्णा अष्टोत्तर शतनामावली
माँ अन्नपूर्णा के 108 नाम — श्री अन्नपूर्णा अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, अन्नपूर्णा जयंती और पूजन के लिए।
श्री ललिता अष्टोत्तर शतनामावली
माँ ललिता के 108 नाम — श्री ललिता अष्टोत्तर शतनामावली (रजताचलशृङ्गाग्र) ध्यान सहित पूरा संस्कृत पाठ, नवरात्रि व कुमकुम अर्चना हेतु।
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली
भगवान दत्तात्रेय के 108 नाम — श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावली (अनसूयासुताय) का पूरा संस्कृत पाठ, दत्त जयंती व गुरुवार पूजन हेतु।
श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली
भगवान नृसिंह के 108 नाम — श्री नृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, नृसिंह जयंती और पूजन के लिए।
श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावली
माँ भुवनेश्वरी के 108 नाम — श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, नवरात्रि और भुवनेश्वरी पूजन के लिए।
श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनामावली
माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) के 108 नाम — श्री बगलामुखी अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, बगलामुखी पूजन के लिए।
श्री छिन्नमस्ता अष्टोत्तर शतनामावली
माँ छिन्नमस्ता के 108 नाम — श्री छिन्नमस्ता अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, छिन्नमस्ता जयंती और महाविद्या पूजन के लिए।
श्री धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली
माँ धूमावती के 108 नाम — श्री धूमावती अष्टोत्तर शतनामावली (शाक्तप्रमोद) का पूरा संस्कृत पाठ, धूमावती जयंती और पूजन के लिए।
श्री कमला अष्टोत्तर शतनामावली
माँ कमला (कमलात्मिका) के 108 नाम — श्री कमला अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, लक्ष्मी और महाविद्या पूजन के लिए।
श्री त्रिपुरसुन्दरी (षोडशी) अष्टोत्तर शतनामावली
माँ त्रिपुरसुन्दरी (षोडशी) के 108 नाम — ब्रह्मयामलोक्त अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, नवरात्रि और देवी पूजन के लिए।
श्री भैरवी अष्टोत्तर शतनामावली
देवी त्रिपुरभैरवी के 108 नाम — शाक्तप्रमोद पर आधारित श्री भैरवी अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, महाविद्या पूजन के लिए।
श्री चामुण्डा अष्टोत्तर शतनामावली
माँ चामुण्डा (चामुण्डेश्वरी) के 108 नाम — श्री चामुण्डा अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, नवरात्रि व देवी पूजन के लिए।
श्री धन्वन्तरि अष्टोत्तर शतनामावली
भगवान धन्वन्तरि के 108 नाम — श्री धन्वन्तरि अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा संस्कृत पाठ, धनतेरस व धन्वन्तरि जयन्ती पूजन के लिए।
श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली (संस्कृत)
हनुमान जी के 108 संस्कृत नाम — पद्मोत्तर पुराण पर आधारित श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली का पूरा पाठ, हनुमान पूजन के लिए।
पूजा विधि
गणेश पूजा विधि (संक्षिप्त)
घर पर सुपारी में गणेश जी की छोटी पूजा: सामग्री, आवाहन, प्राण-प्रतिष्ठा, दस उपचार और प्रार्थना, हर चरण का मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ।
नवग्रह पूजा विधि (संक्षिप्त)
नौ ग्रहों की छोटी घरेलू पूजा: एक साथ आवाहन, दस उपचार और शांति की प्रार्थना, हर चरण का मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ।
कलश स्थापना विधि
पूजा से पहले कलश स्थापित करने की पूरी विधि: भूमि-स्पर्श से वरुण आवाहन और कलश-प्रार्थना तक हर चरण का मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ।
घटस्थापना विधि (नवरात्र कलश स्थापना)
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की सरल विधि: जौ बोना, कलश और नारियल तैयार करना, देवी दुर्गा का आवाहन और पंचोपचार पूजा, सामग्री और नियमों के साथ।
लक्ष्मी पूजा विधि (दीपावली)
दीपावली पर घर में लक्ष्मी जी की षोडशोपचार पूजा के 34 चरण: ध्यान और आवाहन से क्षमा प्रार्थना तक, हर चरण का मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ, सामग्री के साथ।
शिव पूजा विधि (अभिषेक सहित)
घर पर भगवान शिव की षोडशोपचार पूजा के 27 चरण, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और जल से अभिषेक सहित, हर चरण का मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ।
सत्यनारायण पूजा विधि
भगवान सत्यनारायण की षोडशोपचार पूजा के 20 चरण: ध्यान, आवाहन, पंचामृत स्नान से आरती, परिक्रमा और मंत्र-पुष्पांजलि तक, हर चरण का मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ।
विष्णु पूजा विधि (षोडशोपचार)
घर पर भगवान विष्णु की सरल षोडशोपचार पूजा: आवाहन से पुष्पांजलि तक सोलह उपचार, हर उपचार का छोटा नाम-मंत्र और उसका सरल हिंदी अर्थ।
तुलसी पूजा विधि
घर में रोज़ तुलसी पूजा की सरल विधि: स्नान, जल अर्पण का मंत्र, दीपक, फूल-अक्षत, जप और प्रार्थना, साथ में पत्ते तोड़ने और जल देने के नियम।
सूर्य अर्घ्य विधि
सुबह सूर्य को जल (अर्घ्य) देने की सरल विधि: ताँबे का लोटा, पूर्व दिशा, अर्घ्य का मंत्र और उसका अर्थ, परिक्रमा और प्रणाम, साथ में नियम।
गृह प्रवेश पूजा विधि
नए घर में प्रवेश की सरल पूजा विधि: मंगल कलश के साथ प्रवेश, कलश स्थापना, गणेश पूजा, रसोई की पूजा, पहली बार दूध उफनाना और भोग, सामग्री और नियमों के साथ।
जन्माष्टमी पूजा विधि (घर पर)
घर पर जन्माष्टमी की पूजा: सामग्री, संकल्प, आधी रात को बाल गोपाल का जन्म, अभिषेक, श्रृंगार, भोग, आरती, भजन-जप और पारण, हर मंत्र के सरल हिंदी अर्थ के साथ।
राम नवमी पूजा विधि
राम नवमी पर घर में श्रीराम दरबार की पूजा: पवित्रीकरण, संकल्प, गणेश और कलश पूजा, ध्यान, पंचामृत स्नान, अंग पूजा, आरती, पुष्पांजलि और प्रदक्षिणा, मंत्रों के सरल अर्थ के साथ।
महाशिवरात्रि पूजा विधि (चार प्रहर)
महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों की सरल पूजा: हर प्रहर में दूध, दही, घी और शहद से शिवलिंग का अभिषेक और शिव के एक रूप का मंत्र, फिर सूर्योदय पर जप और हवन।
गणेश चतुर्थी स्थापना विधि
गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना: चौकी, कलश, तिलक, वस्त्र, दूर्वा, मंत्र, धूप-दीप, भोग और आरती, साथ में नियम और विसर्जन की सावधानी।
सरस्वती पूजा विधि (वसंत पंचमी)
वसंत पंचमी पर घर में माँ सरस्वती की सरल पूजा: पीली चौकी, कलश-गणेश-नवग्रह पूजा, सरस्वती वंदना, पीला भोग, आरती और प्रसाद, वंदना के सरल अर्थ के साथ।
गोवर्धन पूजा विधि (अन्नकूट)
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा: गोबर से गोवर्धन बनाना, दीप-पूजन, नाभि में दूध-दही, अन्नकूट का भोग, मंत्र के साथ 7 परिक्रमा, गौ पूजा, आरती और प्रसाद।
भाई दूज तिलक विधि
भाई दूज पर बहन द्वारा भाई को तिलक लगाने की सरल विधि: थाली की पूजा, तिलक और पारंपरिक पंक्ति, अक्षत, कलावा, आरती और मिठाई, साथ में नियम।
रक्षाबंधन राखी बाँधने की विधि
रक्षाबंधन पर राखी बाँधने की सरल विधि: थाली, भाई की दिशा, तिलक, अक्षत, आरती, रक्षा मंत्र के साथ दाहिनी कलाई पर राखी, मिठाई, साथ में भद्रा और दूसरे नियम।
छठ पूजा अर्घ्य विधि
छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की सरल विधि: सूप सजाना, दूध-जल का अर्घ्य और मंत्र, छठी मैया के गीत, प्रणाम, साथ में पानी में सुरक्षा की बातें।
कन्या पूजन विधि (नवरात्रि)
नवरात्रि की अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन की सरल विधि: निमंत्रण, पैर धोकर स्वागत, तिलक, रक्षासूत्र, हलवा-पूरी-चने का भोजन और आदर से विदाई, साथ में नियम।
होलिका दहन पूजा विधि
होलिका दहन से पहले की पूजा: पवित्रीकरण, संकल्प, गणेश, अम्बिका, नृसिंह और प्रह्लाद की पूजा, होलिका की प्रार्थना, कच्चे सूत से परिक्रमा और दहन, साथ में आग से सुरक्षा।
धनतेरस पूजा विधि
धनतेरस पर घर में माँ लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर जी की पूजा और शाम को यम दीपक: कलश, संकल्प, स्नान, भोग, मंत्र जप, आरती और प्रसाद, साथ में दीपक की सावधानी।
विश्वकर्मा पूजा विधि
विश्वकर्मा पूजा की सरल विधि: कार्यस्थल और औज़ारों की सफ़ाई, भगवान विश्वकर्मा के सामने औज़ार और मशीनें रखना, दीप, ध्यान, पूजन, आरती और प्रसाद, साथ में मशीनों की सुरक्षा।
वाहन पूजा विधि (नई गाड़ी)
नई गाड़ी की सरल पूजा: आम के पत्ते से जल छिड़कना, स्वस्तिक, फूलमाला, कलावा, कपूर की आरती, नारियल घुमाकर फोड़ना और पहली बार गाड़ी चलाना, साथ में सुरक्षा की बातें।
भूमि पूजन विधि
घर या भवन बनाने से पहले भूमि पूजन की सरल जानकारी: ज़मीन की शुद्धि, बैठने की दिशा, गणेश पूजा, चाँदी के नाग और कलश की पूजा, शेषनाग का आवाहन और रक्षा की प्रार्थना।
पाठ
सुन्दरकाण्ड पाठ
गोस्वामी तुलसीदास के श्रीरामचरितमानस का सुन्दरकाण्ड, 60 दोहों के क्रम में दस भागों में, हर श्लोक, चौपाई, दोहे और छन्द के साथ सरल हिंदी में अर्थ।
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य, यानी दुर्गा सप्तशती: पहले कवच, अर्गला और कीलक, फिर 13 अध्याय, और अंत में सूक्त, रहस्य, कुंजिका और क्षमा प्रार्थना, हर भाग अलग पेज पर, हर श्लोक के सरल हिंदी अर्थ के साथ।
श्रीमद्भगवद्गीता पाठ
महाभारत के भीष्म पर्व की श्रीमद्भगवद्गीता: कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण और अर्जुन का संवाद, 18 अध्याय और 700 श्लोक, हर अध्याय अलग पेज पर, हर श्लोक के सरल हिंदी अर्थ के साथ।
उपाय
सूर्य ग्रह के उपाय
सूर्य के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
चंद्र ग्रह के उपाय
चंद्र के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
मंगल ग्रह के उपाय
मंगल के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
बुध ग्रह के उपाय
बुध के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
गुरु (बृहस्पति) ग्रह के उपाय
गुरु के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
शुक्र ग्रह के उपाय
शुक्र के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
शनि ग्रह के उपाय
शनि के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
राहु ग्रह के उपाय
राहु के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
केतु ग्रह के उपाय
केतु के लिए शास्त्र और परंपरा में बताए अभ्यास: बीज मंत्र, जप-संख्या, स्तोत्र, पूजा, दान और सेवा, हर एक के स्रोत के साथ। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; भक्ति और धैर्य, डर नहीं।
सूर्य महादशा के उपाय
सूर्य की 6 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
चंद्र महादशा के उपाय
चंद्र की 10 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
मंगल महादशा के उपाय
मंगल की 7 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
बुध महादशा के उपाय
बुध की 17 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
गुरु महादशा के उपाय
गुरु की 16 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
शुक्र महादशा के उपाय
शुक्र की 20 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
शनि महादशा के उपाय
शनि की 19 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
राहु महादशा के उपाय
राहु की 18 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
केतु महादशा के उपाय
केतु की 7 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
मंगल दोष (मांगलिक दोष) के उपाय
मंगल दोष क्या माना जाता है, शास्त्र में इसका आधार कहाँ है, और परंपरा के अभ्यास: हनुमान उपासना, मंगलवार व्रत, मंत्र-जप और दान। शांत मन से, डर के बिना।
कालसर्प दोष के उपाय
कालसर्प दोष क्या माना जाता है, इसके बारह नाम किस आधार पर हैं, और परंपरा के सरल अभ्यास: शिव उपासना, ॐ नमः शिवाय का जप और नाग पंचमी। बिना डर और बिना महँगी पूजा के।
पितृ दोष के उपाय
पितृ दोष किसे कहा जाता है, शास्त्र में इसका आधार क्या है, और पूर्वजों की स्मृति में परंपरा के अभ्यास: तर्पण, श्राद्ध, अमावस्या और पितृ पक्ष में भोजन-दान। श्रद्धा से, डर के बिना।
ग्रहण दोष के उपाय
कुंडली में सूर्य या चंद्र के साथ राहु या केतु हों तो उसे ग्रहण दोष कहा जाता है। यह पेज इसका आधार, मतभेद और परंपरा के सरल अभ्यास बताता है: सूर्य को अर्घ्य, सोमवार की शिव पूजा, मंत्र-जप और दान।
गुरु चांडाल दोष के उपाय
कुंडली में गुरु (बृहस्पति) और राहु एक ही राशि में हों तो उसे गुरु चांडाल दोष कहा जाता है। यह पेज इसका आधार, मतभेद और परंपरा के अभ्यास बताता है: गुरुवार, गुरु मंत्र, शिक्षकों का सम्मान और दान।
केमद्रुम योग (केमद्रुम दोष) के उपाय
जब कुंडली में चंद्र के दोनों ओर के भावों में कोई ग्रह न हो, तो उसे केमद्रुम योग कहा जाता है। यह पेज इसका शास्त्रीय आधार, भंग के नियम और परंपरा के अभ्यास बताता है: सोमवार, चंद्र मंत्र, शिव उपासना।
श्रापित दोष के उपाय
कुंडली में शनि और राहु एक ही राशि में हों तो उसे श्रापित दोष कहा जाता है। यह पेज बताता है कि यह नाम कहाँ से आया और परंपरा के कौन से अभ्यास हैं: शनिवार, शनि और राहु मंत्र, हनुमान चालीसा, सेवा और दान।
सर्प दोष (नाग दोष) के उपाय
सर्प दोष या नाग दोष की परंपरा क्या है, शास्त्र में इसका आधार कहाँ है, और नाग देवता की पूजा के परंपरागत अभ्यास: नाग पंचमी, नाग प्रतिमा की पूजा और सर्प-वनों की रक्षा।
नारायण नागबलि
नारायण नागबलि एक पारिवारिक विधि है, जो त्र्यंबकेश्वर में पुरोहितों द्वारा तीन दिन में कराई जाती है। यह पेज बताता है कि यह विधि क्या है, इसका आधार क्या बताया जाता है और इस पर कहाँ मतभेद हैं।
कालसर्प शांति पूजा
कालसर्प शांति पूजा पुरोहितों द्वारा कराई जाने वाली विधि है, जो त्र्यंबकेश्वर और श्रीकालहस्ती जैसे तीर्थों में प्रसिद्ध है। यह पेज बताता है कि यह क्या है, मंदिर जाना वैकल्पिक क्यों है और घर पर क्या किया जा सकता है।
अमावस्या जन्म शांति
अमावस्या तिथि पर हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति की विधि: कलश, सूर्य-चंद्र पूजन, हवन, अभिषेक और दान, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
कृष्ण चतुर्दशी जन्म शांति
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: शिव-प्रतिमा का पूजन, वरुण-कलश, नवग्रह पूजन, हवन और अभिषेक, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
ग्रहण जन्म शांति
सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: नक्षत्र-देवता, सूर्य या चंद्र और राहु की प्रतिमाओं का पूजन, उनके वैदिक मंत्र, हवन और अभिषेक। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
संक्रांति जन्म शांति
सूर्य के राशि बदलने के क्षण (संक्रांति) पर हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: नवग्रह कलश, संक्रांति-सूर्य-चंद्र पूजन, त्र्यम्बक मंत्र का जप, हवन और अभिषेक। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
भद्रा जन्म शांति
भद्रा (विष्टि करण), तिथि-क्षय और व्यतीपात जैसे योगों में हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई सरल शांति: विष्णु-पूजन, शिव मंदिर में घी का दीपक, पीपल की परिक्रमा और हवन। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
एक नक्षत्र जन्म शांति
जब शिशु का जन्म उसी नक्षत्र में हो जिसमें परिवार के किसी सदस्य का हुआ था, तब परंपरा में बताई गई शांति: जन्म-नक्षत्र की प्रतिमा का कलश पर पूजन, 108 आहुतियाँ और कलश-जल का छिड़काव। केवल विधि।
गंडमूल शांति
अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई गंडमूल शांति: शास्त्र का आधार, प्रचलित समय, नक्षत्र-देवता और त्र्यम्बक मंत्र। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
आश्लेषा गंडमूल
आश्लेषा नक्षत्र में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई गंडमूल शांति: शास्त्र में आश्लेषा-मघा की संधि, नक्षत्र-देवता नाग का पूजन, हवन और अभिषेक। केवल विधि, कोई फल-कथन नहीं।
ज्येष्ठा गंडमूल
ज्येष्ठा नक्षत्र में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति: शास्त्र की ज्येष्ठा गंडांत शांति में ऐरावत पर बैठे इंद्र की प्रतिमा, हवन, अभिषेक, इंद्र सूक्त और त्र्यम्बक मंत्र का जप। केवल विधि।
मूल नक्षत्र गंडमूल शांति
मूल नक्षत्र में चंद्रमा रहते हुए जन्म के लिए परंपरा में बताई गई शांति, और ज्येष्ठा-मूल संधि (अभुक्त मूल) की शास्त्रीय शांति: समय, प्रतिमा, कलश, त्र्यम्बक मंत्र से हवन और अभिषेक। केवल विधि।
गंडांत
गंडांत यानी तिथि, नक्षत्र या लग्न की संधि का भाग। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में इसकी तीन परिभाषाएँ और संधि पर हुए जन्म के लिए शांति: प्रकार के अनुसार दान, प्रतिमा-पूजन, अभिषेक और हवन। केवल विधि।
शनि की साढ़ेसाती के उपाय
शनि की साढ़ेसाती क्या है और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: शनि मंत्र, दशरथ कृत स्तोत्र, हनुमान और शिव की उपासना, शनिवार का दान और सेवा। डर नहीं, धैर्य और अच्छे आचरण के साथ।
शनि की ढैय्या के उपाय
शनि की ढैय्या क्या है, जब शनि चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में होते हैं, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: शनि मंत्र, हनुमान और शिव की उपासना, शनिवार का दान। शांत मन से, अपनी सामर्थ्य भर।
शनि गोचर के उपाय
शनि का गोचर चंद्र राशि से कैसे देखा जाता है, फलदीपिका किन स्थानों को अनुकूल मानती है, और प्रतिकूल गोचर में परंपरा कौन-से अभ्यास बताती है: पाठ, पूजा, दान और सेवा।
राहु-केतु गोचर के उपाय
राहु और केतु का गोचर क्या है, वे उलटी चाल से लगभग 18 महीने में राशि बदलते हैं, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: राहु-केतु के मंत्र, दुर्गा, शिव और गणेश की उपासना, दान और सेवा।
गुरु गोचर के उपाय
गुरु (बृहस्पति) का गोचर चंद्र राशि से कैसे देखा जाता है, फलदीपिका किन स्थानों को अनुकूल मानती है, और परंपरा कौन-से अभ्यास बताती है: गुरु मंत्र, गुरुवार का व्रत, विष्णु उपासना और पीली वस्तुओं का दान।
विष योग के उपाय
विष योग किसे कहते हैं, जब शनि और चंद्रमा एक राशि में हों, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: चंद्र और शनि के मंत्र, शिव उपासना, सोमवार और शनिवार का दान, और नियमित दिनचर्या।
अंगारक योग के उपाय
अंगारक योग किसे कहते हैं, जब मंगल और राहु एक राशि में हों, और परंपरा इसमें कौन-से अभ्यास बताती है: हनुमान उपासना, मंगल और राहु के मंत्र, मंगलवार-शनिवार का दान, और क्रोध पर संयम।
शकट योग के उपाय
शकट योग क्या है, फलदीपिका के अनुसार जब चंद्रमा गुरु से छठे, आठवें या बारहवें स्थान में हों, इसका अपवाद क्या है, और परंपरा कौन-से अभ्यास बताती है: गुरु और चंद्र के मंत्र, श्री सूक्त, सेवा और दान।
नाड़ी दोष और उसका परिहार
कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या है, जब दोनों की नाड़ी एक होने पर 8 में से 0 गुण मिलते हैं, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है; साथ में महामृत्युंजय जप और दान, जो बाद की परंपरा के उपाय हैं।
भकूट दोष और उसका परिहार
कुंडली मिलान में भकूट दोष क्या है, जब दोनों की चंद्र राशियाँ एक-दूसरे से 6-8, 2-12 या 5-9 पर हों, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है।
गण दोष और उसका परिहार
कुंडली मिलान में गण दोष क्या है, जब वर-वधू के नक्षत्रों के गण (देव, मनुष्य, राक्षस) मेल न खाएँ, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है। गण स्वभाव का वर्ग है, चरित्र पर निर्णय नहीं।
नवग्रह शांति
नवग्रह शांति क्या है, बृहत्पराशर होराशास्त्र (अध्याय 84) और याज्ञवल्क्य स्मृति इसके बारे में क्या कहते हैं, और घर पर अपनी सामर्थ्य भर इसे कैसे करें। भक्ति का विधान, डर नहीं।
नवग्रह पूजा
नौ ग्रहों की एक साथ पूजा: घर पर संक्षिप्त नवग्रह-पूजन का क्रम, मंदिर के नवग्रह-मंडप की परंपरा, और शास्त्र में इसका आधार।
नवग्रह बीज मंत्र
नौ ग्रहों के बीज मंत्र, एक जगह: जप का सरल तरीका, जप-संख्या पर अलग-अलग परंपराएँ, और चंद्र मंत्र के दो रूप।
नवग्रह स्तोत्र पाठ
वेदव्यास को समर्पित नौ श्लोकों वाला नवग्रह स्तोत्र: यह क्या है, इसका पाठ कैसे करें, और सूर्य वाले पहले श्लोक का सरल अर्थ।
वार अनुसार ग्रह उपाय
सप्ताह का हर दिन एक ग्रह से जुड़ा माना जाता है। किस दिन किस देवता की पूजा, कौन-सा पाठ और क्या दान परंपरा में बताया जाता है, स्रोत के साथ।
नवग्रह दान
हर ग्रह के लिए परंपरा में बताया गया दान: शास्त्र की दक्षिणा-सूची और बाद की प्रचलित सूची, दोनों साथ-साथ। दान अपनी सामर्थ्य भर, आदर से।
नवग्रह मंदिर
नौ ग्रहों से जुड़े प्रसिद्ध मंदिर: कुंभकोणम के आसपास के नौ नवग्रह मंदिर, शनि शिंगणापुर, उज्जैन का मंगलनाथ और गुवाहाटी का नवग्रह मंदिर। परंपरा की जानकारी, कोई बुकिंग नहीं।
महामृत्युंजय जाप
ऋग्वेद के त्र्यम्बक मंत्र का जप: मंत्र, उसका सरल अर्थ, वैदिक स्रोत, बृहत्पराशर होराशास्त्र में इसका उल्लेख, और घर पर जप का सरल तरीका।
सूर्य अर्घ्य
उगते सूर्य को जल अर्पित करना: संध्यावंदन में इसका वैदिक रूप, गायत्री मंत्र और उसका सरल अर्थ, और घर पर रोज़ अर्घ्य देने का सरल तरीका।
शनिवार पीपल पूजा
शनिवार को पीपल (अश्वत्थ) की पूजा और स्पर्श: ब्रह्म पुराण की कथा जिसमें इसका आधार है, घर के पास सरल विधि, और कौन-सी बातें लोक-प्रथा हैं।
ग्रह शांति हेतु हनुमान उपासना
मंगलवार और शनिवार को हनुमान की उपासना, जो परंपरा में शनि और मंगल के लिए की जाती है: सरल विधि, हनुमान चालीसा, और शनि-हनुमान कथा किस रूप में मिलती है।
विष्णु सहस्रनाम पाठ
भगवान विष्णु के हज़ार नामों का पाठ: महाभारत में इसका स्थान, बृहत्पराशर होराशास्त्र में इसका उल्लेख, और घर पर पाठ का सरल तरीका।
दुर्गा सप्तशती पाठ
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य, चंडी पाठ) का पाठ: मार्कंडेय पुराण में इसका स्थान, इसकी तीन कथाएँ, पाठ का पारंपरिक क्रम, और बृहत्पराशर होराशास्त्र में इसका उल्लेख।
