मराठीत वाचा

गण दोष और उसका परिहार

कुंडली मिलान में गण दोष क्या है, जब वर-वधू के नक्षत्रों के गण (देव, मनुष्य, राक्षस) मेल न खाएँ, और परंपरा इसके परिहार के कौन-से नियम बताती है। गण स्वभाव का वर्ग है, चरित्र पर निर्णय नहीं।

कुछ खंडों को अभी दूसरे स्रोत से मिलाया जा रहा है

अंतिम जाँच:

इस उपाय के बारे में

अष्टकूट मिलान में हर जन्म-नक्षत्र तीन गणों में से एक में आता है: देव, मनुष्य या राक्षस। ये स्वभाव के वर्ग हैं, किसी व्यक्ति के चरित्र पर निर्णय नहीं; जगन्नाथ होरा के अनुसार 'राक्षस' गण का अर्थ यहाँ तीव्र, दृढ़ और साहसी स्वभाव है, बुरा होना नहीं। गण कूट के 6 गुण होते हैं। एक गण हो तो पूरे 6 गुण, देव-मनुष्य हो तो लगभग पूरे, और राक्षस गण का दूसरे गण से मेल हो तो बहुत कम गुण मिलते हैं; इसी को गण दोष कहा जाता है।

यह कहाँ से आता है

धर्मसिंधु (विवाह प्रकरण, कामकोटि वेबसाइट का अंग्रेज़ी अनुवाद): एक गण उत्तम, देव-मनुष्य मध्यम, और देव-राक्षस वर्जित; उसी अनुवाद में राक्षस-मनुष्य को भी प्रतिकूल कहा गया है। वहाँ यह भी है कि राशि एक पर नक्षत्र अलग हों तो नाड़ी-गण देखने की ज़रूरत नहीं। ग्रंथ में इसका कोई जप या दान नहीं दिया गया।

जहाँ परंपराएँ अलग हैं

(1) अंक: जगन्नाथ होरा देव-मनुष्य को 5, मनुष्य-राक्षस को 1 और देव-राक्षस को 0 देता है; KDD का मिलान ऊँचे गण वाले वर को ज़्यादा अंक देता है (देव वर और राक्षस वधू 1, राक्षस वर और देव वधू 0, मनुष्य-राक्षस 0), और यह दिशा प्रकाशित तालिकाओं में एक-सी नहीं है। (2) कौन-से मेल दोष हैं: केवल देव-राक्षस (जगन्नाथ होरा), या मनुष्य-राक्षस भी (धर्मसिंधु का अनुवाद)। (3) दक्षिण भारत का गण पोरुत्तम वधू के गण को ज़्यादा महत्व देता है: प्रोकेरला के अनुसार राक्षस गण की वधू का दूसरे गण से मेल सबसे कम माना जाता है, जबकि राक्षस वर का देव या मनुष्य वधू से मेल मध्यम। (4) परिहार के नियम केवल जगन्नाथ होरा और धर्मसिंधु के अनुवाद में मिले।

नियम और किन बातों से बचें

  • परिहार 1: दोनों राशियों का स्वामी एक हो, या दोनों के नक्षत्र-स्वामी एक हों, तो जगन्नाथ होरा के अनुसार गण दोष नहीं माना जाता।
  • परिहार 2: दोनों राशि-स्वामियों में गहरी मित्रता हो, तो भी (जगन्नाथ होरा)।
  • परिहार 3: तारा और योनि कूट का अच्छा मेल हो, या कुल गुण 26 से ऊपर हों, तो जगन्नाथ होरा मानता है कि यह दोष हट जाता है।
  • परिहार 4: धर्मसिंधु के अनुवाद के अनुसार राशि एक हो पर नक्षत्र अलग, तो गण देखने की ज़रूरत नहीं।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या राक्षस गण का अर्थ बुरा व्यक्ति है?

नहीं। गण जन्म-नक्षत्र पर आधारित स्वभाव का वर्ग है; जगन्नाथ होरा के अनुसार इसका अर्थ तीव्र और साहसी स्वभाव है, किसी के चरित्र पर निर्णय नहीं।

गण दोष का कोई जप या दान है?

पढ़े गए स्रोतों में कोई नहीं मिला; परंपरा का उत्तर परिहार के नियम हैं।