राहु महादशा के उपाय
राहु की 18 वर्ष की महादशा के लिए पाराशर होरा शास्त्र के अंतर्दशा-वार उपाय, बीज मंत्र, स्तोत्र, दान और सेवा, स्रोत सहित। घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास पहले; कोई भविष्यवाणी या डर नहीं।
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अंतिम जाँच:
इस उपाय के बारे में
विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्षों के चक्र को नौ ग्रहों की महादशाओं में बाँटा जाता है; राहु की महादशा 18 वर्ष की मानी जाती है। हर महादशा के भीतर नौ अंतर्दशाएँ आती हैं। पाराशर होरा शास्त्र पूरी महादशा के लिए एक सूची नहीं देता: किसी अंतर्दशा का स्वामी कुंडली में कठिन स्थिति में हो, तो उस अंतर्दशा के लिए उपाय बताता है। नीचे वे उपाय और दशा-स्वामी राहु के सामान्य अभ्यास हैं। नीचे हर अभ्यास उसके स्रोत के साथ है। इन्हें शांत मन और श्रद्धा से, अपनी सामर्थ्य भर करें।
यह कहाँ से आता है
पाराशर होरा शास्त्र का अध्याय 55 राहु की महादशा में आने वाली अंतर्दशाओं का वर्णन करता है, और जिस अंतर्दशा का स्वामी कठिन स्थिति में हो, उसके लिए जप, पाठ, पूजा या दान बताता है। अंतर्दशा-वार जप और पाठ नीचे 'पूजा' में हैं। इसी अध्याय में कई अंतर्दशाओं के लिए दान भी बताया गया है: गाय, भैंस, बैल और बकरी। अध्याय 84 का सामान्य नियम भी यही है कि जो ग्रह जिस समय कठिन स्थिति में हो, उसकी पूजा करें।
जहाँ परंपराएँ अलग हैं
पाराशर होरा शास्त्र हर उपाय को एक अंतर्दशा और ग्रह की स्थिति से जोड़ता है, पूरी महादशा से नहीं; बाज़ार के कई लेख पूरी महादशा के लिए एक ही सूची और रत्न बताते हैं। यह पेज शास्त्र का तरीका रखता है। दशा-स्वामी के वार का व्रत, बीज मंत्र और दान-सूची ग्रह के प्रचलित उपायों से ली गई है, दशा-अध्याय से नहीं। अंतर्दशा-वार उपाय इस अध्याय के अंग्रेज़ी अनुवाद के एक पुनर्प्रकाशन से लिए गए हैं; संस्कृत श्लोकों से एक-एक मिलान अभी बाकी है। शास्त्र में बताए पशु-दान इस पेज की दान-सूची में नहीं रखे गए हैं।
मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ।
अर्थ: यह राहु का बीज मंत्र है। 'भ्रां', 'भ्रीं', 'भ्रौं' और 'सः' बीज अक्षर हैं, जिनका कोई शब्द-अर्थ नहीं होता; परंपरा में इन्हें राहु से जुड़ी पवित्र ध्वनियाँ माना जाता है। 'राहवे नमः' का अर्थ है: राहु देव को नमस्कार।
पूजा
- सबसे पहले अपनी जन्म-कुंडली की विंशोत्तरी दशा-तालिका में देखें कि राहु महादशा में अभी कौन सी अंतर्दशा चल रही है।
- दशा-स्वामी राहु के बीज मंत्र (ऊपर) का जप माला से करें, विशेषकर शनिवार को।
- राहु की अंतर्दशा में (जब राहु कठिन स्थिति में हो): राहु मंत्रों का जप; पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 55।
- गुरु की अंतर्दशा में (जब गुरु कठिन स्थिति में हो): शिव की पूजा; पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 55।
- बुध की अंतर्दशा में (जब बुध कठिन स्थिति में हो): विष्णु सहस्रनाम का पाठ; पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 55।
- शुक्र की अंतर्दशा में (जब शुक्र कठिन स्थिति में हो): दुर्गा और लक्ष्मी की पूजा; पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 55।
- सूर्य की अंतर्दशा में (जब सूर्य कठिन स्थिति में हो): सूर्य-पूजा; पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 55।
- वैदिक विधि (शास्त्र की ऋचा और समिधा से हवन) करनी हो तो किसी जानकार आचार्य से सीखकर ही करें।
दान
- काले तिल
- उड़द
- कंबल
दिन: शनिवार, ज़रूरतमंद लोगों को
जो दे सकें, उसे दें जिसे उसकी ज़रूरत हो। परंपरा में देने का भाव मायने रखता है, दी गई चीज़ की कीमत नहीं।
सेवा और दिनचर्या
- कौओं, पक्षियों और बेसहारा पशुओं को भोजन-पानी दें; ऑनलाइन ज्योतिष राहु के लिए यह अभ्यास बताता है।
स्तोत्र और पाठ
- राहु कवचम्
- श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम्
- आदित्यहृदय स्तोत्रम्
- सप्तश्लोकी दुर्गा
व्रत
नियम और किन बातों से बचें
- दान और पूजा अपनी सामर्थ्य भर करें; पाराशर होरा शास्त्र का ग्रह-शांति अध्याय भी यथाशक्ति देने की बात कहता है।
- मंत्र का शुद्ध उच्चारण और संकल्प की विधि किसी जानकार गुरु या पंडित से सीखें।
- व्रत तभी रखें जब स्वास्थ्य अनुमति दे; कोई रोग हो, गर्भावस्था हो या दवा चल रही हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
- किसी भी उपाय के लिए महंगी पूजा, रत्न या यंत्र खरीदना ज़रूरी नहीं है। घर पर किया गया जप, पाठ, दान और सेवा परंपरा के सामान्य अभ्यास हैं।
लोग अक्सर पूछते हैं
राहु महादशा कितने वर्ष की होती है?
विंशोत्तरी दशा पद्धति में राहु की महादशा 18 वर्ष की मानी जाती है; सभी नौ महादशाएँ मिलकर 120 वर्ष का चक्र बनाती हैं। किसी व्यक्ति की पहली दशा जन्म के समय चंद्र के नक्षत्र से तय होती है, इसलिए हर किसी को हर महादशा पूरी नहीं मिलती।
क्या पूरी राहु महादशा में एक ही उपाय करना होता है?
पाराशर होरा शास्त्र ऐसा नहीं कहता। वह हर अंतर्दशा के लिए अलग उपाय देता है, और वह भी तब, जब उस अंतर्दशा का स्वामी कठिन स्थिति में हो। सामान्य रूप से दशा-स्वामी का मंत्र-जप और सेवा पूरे समय की जा सकती है।
क्या राहु महादशा में रत्न पहनना ज़रूरी है?
नहीं। पाराशर होरा शास्त्र के दशा-अध्यायों में रत्न का विधान नहीं है; वहाँ जप, पाठ, पूजा और दान बताए गए हैं। रत्न को ग्रह से जोड़ना बाद की रत्न-परंपरा की मान्यता है। पहले घर पर होने वाले मुफ्त अभ्यास करें।
क्या महादशा से डरना चाहिए?
नहीं। हर व्यक्ति के जीवन में सभी ग्रहों की दशाएँ क्रम से आती हैं, और परंपरा किसी दशा को केवल अच्छा या बुरा नहीं मानती; फल पूरी कुंडली पर निर्भर माना जाता है। यह पेज किसी घटना या तारीख की भविष्यवाणी नहीं करता; यहाँ केवल भक्ति के अभ्यास हैं।
इस पाठ के बारे में
सार्वजनिक (कॉपीराइट से मुक्त): पारंपरिक पाठ (पारंपरिक नवग्रह बीज मंत्र (रचयिता अज्ञात))।
पारंपरिक पाठ वैसा ही दिया गया है जैसा प्रचलित छपे संस्करणों में मिलता है। इस पेज का हर अर्थ हमने अपने शब्दों में लिखा है।
