कवच
आरती, चालीसा, स्तोत्र, मंत्र और नामावली: हर पाठ पूरा, और जहाँ लिखा जा चुका है वहाँ उसका सरल हिंदी अर्थ।
कवच
नारायण कवच
नारायण कवच का संपूर्ण संस्कृत पाठ — श्रीमद्भागवत ६.८, विश्वरूप द्वारा इन्द्र को उपदिष्ट नारायण-वर्म, ४२ श्लोक, न्यास सहित।
सूर्य कवचम् (याज्ञवल्क्य कृत)
सूर्य कवचम् — "शृणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्" का पूरा संस्कृत पाठ, रविवार व सूर्य उपासना हेतु। परंपरा में इसे महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा कहा गया माना जाता है।
शनि वज्रपंजर कवचम्
शनि वज्रपंजर कवचम् — विनियोग, ध्यान सहित पूरा संस्कृत पाठ (ब्रह्माण्ड पुराण), शनिवार व शनि उपासना हेतु।
नवग्रह कवचम्
नवग्रह कवचम् — "शिरो मे पातु मार्ताण्डो" से आरम्भ, ग्रहयामल से लिया गया माना जाने वाला कवच; पूरा संस्कृत पाठ, नवग्रह पूजन व ग्रह-शांति हेतु।
सरस्वती कवचम् (ब्रह्मवैवर्त पुराण)
सरस्वती कवचम् (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड) — "ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः" का पूरा संस्कृत पाठ।
पञ्चमुखी हनुमत् कवचम्
पञ्चमुखी हनुमत् कवचम् (सुदर्शन संहिता से जुड़ा माना जाता है) — ध्यान, न्यास व मंत्र सहित पूरा संस्कृत पाठ, मंगलवार-शनिवार हनुमान पूजा हेतु।
श्री राम कवचम्
श्री राम कवचम् (आनंद रामायण, अगस्त्य-सुतीक्ष्ण संवाद) — ध्यान सहित पूरा संस्कृत पाठ, रामनवमी व राम उपासना हेतु।
राहु कवचम्
राहु कवचम् – “प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिनम्” – विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ।
केतु कवचम्
केतु कवचम् – “केतुं करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम्” – विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्माण्ड पुराण से लिया गया बताता है।
चन्द्र कवचम्
चन्द्र कवचम् – “समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम्” – गौतम ऋषि विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ।
मंगल कवचम्
मंगल कवचम् (अंगारक कवच) – “रक्ताम्बरो रक्तवपुः किरीटी” – विनियोग सहित संपूर्ण संस्कृत पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे मार्कण्डेय पुराण से लिया गया बताता है।
बुध कवचम्
बुध कवचम् संस्कृत में – "बुधस्तु पुस्तकधरः" से आरम्भ, बुध देव का कवच, विनियोग सहित सम्पूर्ण पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्मवैवर्त पुराण का अंश बताता है।
बृहस्पति कवचम्
बृहस्पति कवचम् (गुरु कवच) संस्कृत में – देवगुरु बृहस्पति का कवच, "अभीष्टफलदं देवं" ध्यान सहित सम्पूर्ण पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्मयामल से लिया गया बताता है।
शुक्र कवचम्
शुक्र कवचम् संस्कृत में – भार्गव शुक्राचार्य का कवच, "मृणालकुन्देन्दु" ध्यान और विनियोग सहित सम्पूर्ण पाठ। पाठ का समापन-वाक्य इसे ब्रह्माण्ड पुराण का अंश बताता है।
श्री गोपाल कवचम्
श्री गोपाल कवचम् संस्कृत में – शिव-पार्वती संवाद रूप बालकृष्ण का कवच, "अथ वक्ष्यामि कवचं गोपालस्य" से सम्पूर्ण पाठ। पाठ के समापन-वाक्य के अनुसार यह नारद पञ्चरात्र का अंश है।
बटुक भैरव कवचम्
बटुक भैरव कवचम् संस्कृत में – "ॐ सहस्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरुः" से आरम्भ, विनियोग सहित सम्पूर्ण पाठ। इसे भैरव तन्त्र से लिया गया बताया जाता है।
माँ कूष्माण्डा कवच
माँ कूष्माण्डा कवच संस्कृत में – "हंसरै में शिर पातु" से आरम्भ, नवरात्रि के चौथे दिन पढ़ा जाने वाला नवदुर्गा कवच, सम्पूर्ण पाठ।
माँ कात्यायनी कवच
माँ कात्यायनी कवच संस्कृत में – "कात्यायनौमुख पातु" से आरम्भ, नवरात्रि के छठे दिन पढ़ा जाने वाला नवदुर्गा कवच, सम्पूर्ण पाठ।
काली कवचम् (त्रैलोक्य विजय)
काली कवचम् (त्रैलोक्य विजय) का सम्पूर्ण संस्कृत पाठ — महानिर्वाणतन्त्र (सप्तम उल्लास) में सदाशिव द्वारा कहा गया आद्या काली का कवच।
स्कन्द कवचम् (स्कन्दाक्षय कवच)
स्कन्द कवचम् (स्कन्दाक्षय / कार्तिकेयाक्षय कवच) का संस्कृत पाठ — भगवान कार्तिकेय का कवच, जिसे उमायामल के देवकी-नारद संवाद से लिया गया माना जाता है।
श्री तुलसी कवचम् (ब्रह्माण्ड पुराण)
श्री तुलसी कवचम् – ब्रह्माण्ड पुराण के तुलसी-माहात्म्य से संपूर्ण संस्कृत पाठ, विनियोग सहित, तुलसी पूजन और कार्तिक मास के लिए।
