मराठीत वाचा

पितर जी की आरती – जय जय पितरजी महाराज

जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूँ थारी – पितृ पक्ष और श्राद्ध में गाई जाने वाली पितर जी की आरती का पूरा पाठ।

हर खंड कम से कम दो स्रोतों से मिलाया गया है

अंतिम जाँच:

रचयिता और परंपरा

पारंपरिक पाठ।

कब पढ़ा जाता है

इसे विशेष रूप से पितृ पक्ष (श्राद्ध) के दिनों में और अमावस्या को पितरों के पूजन के समय गाया जाता है।

इस पाठ के बारे में

यह आरती परिवार के दिवंगत पूर्वजों, यानी पितरों, को समर्पित है, जिसमें भक्त उनकी शरण लेकर परिवार की रक्षा की प्रार्थना करता है।

पाठ

  1. जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूँ थारी ।
    शरण पड़यो हूँ थारी बाबा, शरण पड़यो हूँ थारी ॥

    अर्थ

    हे पितरजी महाराज, आपकी जय हो। हे बाबा, मैं आपकी शरण में आया हूँ।

  2. आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे ।
    मैं मूरख हूँ कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे ॥
    जय जय पितरजी महाराज ॥

    अर्थ

    आप ही रक्षक हैं, आप ही दाता और आप ही पार लगाने वाले हैं। मैं नासमझ हूँ, कुछ नहीं जानता; आप ही मेरे रखवाले हैं।

  3. आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी ।
    हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी ॥
    जय जय पितरजी महाराज ॥

    अर्थ

    आप हर घड़ी मेरी रखवाली के लिए खड़े हैं। हम सब आपकी शरण में हैं, यही हमारी विनती है।

  4. देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई ।
    काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई ॥
    जय जय पितरजी महाराज ॥

    अर्थ

    देश-परदेश, हर जगह आप ही सहायता करते हैं। काम पड़ने पर आपका नाम बहुत सुख देने वाला लगता है।

  5. भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार ।
    रक्षा करो आप ही सबकी, रटूँ मैं बारम्बार ॥
    जय जय पितरजी महाराज ॥

    अर्थ

    सब भक्त अपने परिवार सहित आपकी शरण में हैं। मैं बार-बार यही रटता हूँ कि आप ही सबकी रक्षा कीजिए।

इस पाठ के बारे में

सार्वजनिक (कॉपीराइट से मुक्त): पारंपरिक पाठ (पारंपरिक)।

पारंपरिक पाठ वैसा ही दिया गया है जैसा प्रचलित छपे संस्करणों में मिलता है। इस पेज का हर अर्थ हमने अपने शब्दों में लिखा है।