श्री वेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र

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Sri Venkateswara Vajra Kavacha Stotram

मार्कण्डेय उवाच

नारायणं परब्रह्म सर्वकारण कारकं

प्रपद्ये वेङ्कटेशाख्यां तदेव कवचं मम ॥

सहस्रशीर्षा पुरुषो वेङ्कटेशश्शिरो वतु

प्राणेशः प्राणनिलयः प्राणाण् रक्षतु मे हरिः ॥

आकाशराट् सुतानाथ आत्मानं मे सदावतु

देवदेवोत्तमोपायाद्देहं मे वेङ्कटेश्वरः ॥

सर्वत्र सर्वकालेषु मङ्गाम्बाजानिश्वरः

पालयेन्मां सदा कर्मसाफल्यं नः प्रयच्छतु ॥

य एतद्वज्रकवचमभेद्यं वेङ्कटेशितुः

सायं प्रातः पठेन्नित्यं मृत्युं तरति निर्भयः ॥

॥ इति श्री वेङ्कटेस्वर वज्रकवचस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्री वेंकटेश्वर वज्र कवच स्तोत्र
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Gyanchand Bundiwal
Gemologist, Astrologer. Owner at Gems For Everyone and Koti Devi Devta.
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