सोमवार व्रत
सोमवार का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ रखा जाता है। यहाँ इसकी विधि, सामग्री, सोमवार व्रत कथा, मंत्र, नियम और उद्यापन की जानकारी है।
हर खंड कम से कम दो स्रोतों से मिलाया गया है
अंतिम जाँच:
यह व्रत कब रखा जाता है
हर सोमवार को। परंपरा में इसे श्रावण, चैत्र, वैशाख, कार्तिक या मार्गशीर्ष महीने के पहले सोमवार से शुरू करने की बात कही गई है। कोई इसे संकल्प की संख्या तक रखता है, कोई 1 वर्ष या 14 वर्ष तक, और फिर उद्यापन करता है।
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इस व्रत के बारे में
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले शिव जी और माता पार्वती की पूजा करते हैं और पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुनते या पढ़ते हैं।
परंपरा में सोमवार व्रत के कई रूप बताए जाते हैं: हर सोमवार का साधारण व्रत, सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार व्रत। सावन के सोमवार और सोलह सोमवार के अलग पृष्ठ भी हैं। नवग्रह परंपरा में सोमवार चंद्र का दिन भी माना जाता है।
पूजा सामग्री
- जल से भरा लोटा
- गाय का कच्चा दूध
- शहद
- बेलपत्र
- सफ़ेद फूल
- चंदन
- कपूर
- धूप और दीपक
- सफ़ेद वस्त्र
विधि, क्रम से
हर चरण पूरा होने पर उस पर निशान लगाएँ। निशान दिन खत्म होने तक इसी डिवाइस पर रहते हैं।
मंत्र
ॐ नमः शिवाय
अर्थ: भगवान शिव को नमस्कार। इसे शिव का मूल मंत्र कहा जाता है।
जप शुरू करें KDD पंचांग में जप काउंटर खुलेगा: एक माला में 108।
व्रत कथा
कथा पढ़ें
किसी नगर में एक धनवान साहूकार रहता था। धन की कोई कमी नहीं थी, पर घर में संतान न होने से वह उदास रहता था। वह हर सोमवार उपवास करता और शाम को शिव मंदिर में दीपक जलाकर शिव-पार्वती की पूजा करता।
एक दिन माता पार्वती ने शिव जी से कहा कि यह साहूकार इतने समय से आपकी सेवा कर रहा है, इसकी इच्छा पूरी कीजिए। शिव जी बोले कि हर प्राणी को अपने कर्मों के अनुसार ही मिलता है और इसके भाग्य में संतान नहीं लिखी। पार्वती जी के बार-बार कहने पर शिव जी ने पुत्र का वर दे दिया, पर साथ ही बताया कि बालक केवल 12 वर्ष जिएगा। साहूकार ने यह बात सुनी, फिर भी वह पहले की तरह पूजा करता रहा।
कुछ समय बाद उसके घर पुत्र जन्मा। जब बालक 11 वर्ष का हुआ, तो साहूकार ने उसे पढ़ने के लिए उसके मामा के साथ काशी भेजा और कहा कि रास्ते में जहाँ ठहरो, वहाँ यज्ञ करना और दान देना।
रास्ते के एक नगर में राजा की बेटी का विवाह होने वाला था। जिस राजकुमार से विवाह तय था, वह एक आँख से देख नहीं सकता था। उसके पिता ने यह बात छिपाने के लिए साहूकार के बेटे को कुछ समय के लिए दूल्हा बना दिया, और विवाह हो गया। पर लड़के का मन सच छिपाने को नहीं माना। विदा से पहले उसने राजकुमारी की ओढ़नी पर लिख दिया कि तुम्हारा विवाह मुझसे हुआ है, और जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जा रहा है, वह एक आँख से देख नहीं सकता।
मामा और भांजा काशी पहुँचे। जिस दिन लड़का 12 वर्ष का हुआ, उसकी तबीयत बिगड़ी और उसके प्राण चले गए। मामा रोने लगा। उसी समय शिव-पार्वती वहाँ से गुज़र रहे थे। रोना सुनकर पार्वती जी का मन भर आया और उन्होंने शिव जी से बालक को जीवन देने की विनती की। शिव जी ने कहा कि इसकी आयु पूरी हो चुकी थी, पर पार्वती जी के कहने पर उन्होंने उसे फिर से जीवन दे दिया।
पढ़ाई पूरी करके दोनों घर की ओर लौटे। उसी नगर में पहुँचकर उन्होंने यज्ञ किया, जहाँ राजा ने लड़के को पहचान लिया और बेटी को बड़े सम्मान के साथ उसके साथ विदा किया। घर पहुँचकर माता-पिता अपने बेटे और बहू को सकुशल देखकर बहुत प्रसन्न हुए।
उसी रात शिव जी ने साहूकार को सपने में बताया कि तुम्हारे सोमवार के व्रत और कथा सुनने से प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारे पुत्र को लंबी आयु दी है। कथा के अनुसार, जो श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखता और यह कथा सुनता है, उस पर शिव जी की कृपा रहती है।
नियम और किन बातों से बचें
- व्रत के दिन एक ही बार भोजन करें; परंपरा में यह भोजन दिन के तीसरे पहर के बाद लिया जाता है।
- पूजा से पहले स्नान करें, और कथा पूजा के बाद सुनें।
- व्रत के रूप के अनुसार भोजन के नियम बदल सकते हैं; अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम तय करें।
- जिन्हें स्वास्थ्य के कारण उपवास कठिन हो, वे डॉक्टर की सलाह से ही व्रत रखें।
उद्यापन
संकल्प के सोमवार (या 1 वर्ष, या 14 वर्ष) पूरे होने पर उद्यापन किया जाता है। परंपरा में आचार्य को बुलाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा की पूजा और हवन किया जाता है, और 16 ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है। कुछ परिवार केले के खंभों से मंडप सजाकर, सफ़ेद वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं। उद्यापन की पूरी विधि अपने पुरोहित से पूछकर करें।
लोग अक्सर पूछते हैं
सोमवार व्रत कब से शुरू करें?
परंपरा में श्रावण, चैत्र, वैशाख, कार्तिक या मार्गशीर्ष महीने के पहले सोमवार से शुरू करना बताया गया है।
सोमवार व्रत में भोजन कब करें?
परंपरा के अनुसार दिन के तीसरे पहर तक व्रत रखकर दिन में एक ही बार भोजन किया जाता है।
सोमवार व्रत और सोलह सोमवार व्रत में क्या अंतर है?
साधारण सोमवार व्रत हर सोमवार या संकल्प की अवधि तक रखा जाता है। सोलह सोमवार व्रत में लगातार 16 सोमवार का संकल्प होता है, और उसकी कथा भी अलग है।
