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रथ सप्तमी (अचला सप्तमी)

रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी को सूर्य देव की पूजा का दिन है, जिसे अचला सप्तमी और सूर्य जयंती भी कहते हैं। यहाँ इसकी तिथि, अरुणोदय स्नान, अर्घ्य की विधि, सामग्री, इंदुमती की कथा और नियम हैं।

हर खंड कम से कम दो स्रोतों से मिलाया गया है

अंतिम जाँच:

यह व्रत कब रखा जाता है

माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को। स्नान सूर्योदय से पहले अरुणोदय काल में किया जाता है और सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

इस व्रत के बारे में

रथ सप्तमी सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव प्रकट हुए थे, इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहते हैं। इसे माघ सप्तमी, अचला सप्तमी और आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है। इसका नाम सूर्य के रथ से जुड़ा है; परंपरा में इस दिन सूर्य के रथ का उत्तर दिशा की ओर मुड़ना माना जाता है।

इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान और फिर सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। दक्षिण भारत में घरों के आगे रथ और सात घोड़ों की रंगोली बनाई जाती है और तिरुमला, श्रीरंगम जैसे मंदिरों में बड़ा उत्सव होता है।

पूजा सामग्री

  • जल से भरा तांबे का लोटा या छोटा कलश
  • आक (अर्क) के सात पत्ते और बेर के सात पत्ते
  • लाल फूल, चंदन, अक्षत और दूर्वा
  • मिट्टी का दीपक और घी
  • धूप और कपूर
  • गुड़ और तिल

विधि, क्रम से

हर चरण पूरा होने पर उस पर निशान लगाएँ। निशान दिन खत्म होने तक इसी डिवाइस पर रहते हैं।

व्रत कथा

कथा पढ़ें

बहुत पुराने समय की बात है। इंदुमती नाम की एक गणिका थी। जीवन के अंतिम वर्षों में उसे अपने बीते जीवन पर पछतावा होने लगा। वह सोचती थी कि उसने कभी कोई धर्म-कर्म नहीं किया, अब उसका क्या होगा।

एक दिन यही चिंता मन में लेकर वह महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में पहुँची। उसने हाथ जोड़कर मुनि से पूछा कि मुझ जैसी स्त्री के उद्धार का कोई रास्ता है क्या। वशिष्ठ जी ने उसकी सच्ची व्याकुलता देखी और कहा कि माघ मास की शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत करो, सूर्य देव की पूजा करो और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दो।

इंदुमती ने मुनि की बताई विधि से पूरी श्रद्धा के साथ व्रत किया। कथा के अनुसार जब उसने देह छोड़ी, तो इस व्रत के पुण्य से इंद्र ने उसे स्वर्ग में अप्सराओं की प्रमुख बनाया।

नियम और किन बातों से बचें

  • इस दिन केवल एक बार भोजन किया जाता है।
  • भोजन में नमक नहीं लिया जाता; कुछ परंपराओं में तेल भी नहीं।
  • व्रत का संकल्प लेकर ही उपवास करें और सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
  • जिन्हें स्वास्थ्य के कारण उपवास कठिन हो, वे डॉक्टर की सलाह से ही व्रत रखें।

लोग अक्सर पूछते हैं

रथ सप्तमी और अचला सप्तमी में क्या अंतर है?

कोई अंतर नहीं; यह एक ही पर्व के कई नाम हैं: रथ सप्तमी, अचला सप्तमी, माघ सप्तमी, सूर्य जयंती और आरोग्य सप्तमी। सभी माघ शुक्ल सप्तमी के सूर्य व्रत के नाम हैं।

अरुणोदय स्नान क्या है?

सूर्योदय से ठीक पहले का समय, जब आकाश में लाली आने लगती है, अरुणोदय कहलाता है। रथ सप्तमी पर इसी समय स्नान करने की परंपरा है।

सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?

सूर्योदय के समय पूर्व की ओर मुख करके खड़े हों और हाथ जोड़कर छोटे कलश से धीरे-धीरे जल अर्पित करें।