बुधवार व्रत
बुधवार का व्रत गणेश जी की पूजा के साथ रखा जाता है; बुध ग्रह का व्रत भी इसी दिन होता है। यहाँ इसकी विधि, सामग्री, बुधवार व्रत कथा, मंत्र, नियम और उद्यापन की जानकारी है।
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अंतिम जाँच:
यह व्रत कब रखा जाता है
हर बुधवार को। गणेश जी के व्रत में 11, 21 या 31 बुधवार का संकल्प लिया जाता है; कई लोग 7 बुधवार रखते हैं। बुध ग्रह का व्रत विशाखा नक्षत्र वाले बुधवार से शुरू करके लगातार 7 बुधवार रखा जाता है।
इस व्रत की गिनती रखें KDD पंचांग में "मेरे व्रत" खुलेगा। आपकी गिनती आपके अपने डिवाइस पर ही रहती है।
इस व्रत के बारे में
बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित माना जाता है, और ज्योतिष में यह बुध ग्रह का दिन है। इस दिन गणेश जी की पूजा दूर्वा, लाल फूल और मोदक से की जाती है, और बुधवार व्रत की कथा सुनी जाती है।
परंपरा में इसके दो रूप हैं: गणेश जी का बुधवार व्रत और बुध ग्रह का व्रत। बुध ग्रह के व्रत में भोजन सूर्यास्त के बाद एक बार किया जाता है। हरे रंग की चीज़ें इस दिन शुभ मानी जाती हैं।
पूजा सामग्री
- गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
- लाल कपड़ा और चौकी
- दूर्वा
- लाल फूल
- रोली और अक्षत
- चंदन
- पान के पत्ते
- धूप, दीपक और कपूर
- मोदक या लड्डू
विधि, क्रम से
हर चरण पूरा होने पर उस पर निशान लगाएँ। निशान दिन खत्म होने तक इसी डिवाइस पर रहते हैं।
मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
अर्थ: गणपति (गणेश जी) को नमस्कार। इसका जाप अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया जाता है।
जप शुरू करें KDD पंचांग में जप काउंटर खुलेगा: एक माला में 108।
व्रत कथा
कथा पढ़ें
एक नगर में मधुसूदन नाम का एक धनी व्यक्ति रहता था। उसकी पत्नी संगीता अपने मायके गई हुई थी। मधुसूदन उसे लेने ससुराल पहुँचा। कुछ दिन रुककर उसने सास-ससुर से पत्नी को विदा करने को कहा। उन्होंने कहा कि आज बुधवार है, और इस दिन विदाई की यात्रा नहीं की जाती। पर मधुसूदन नहीं माना और उसी दिन पत्नी को लेकर गाड़ी में चल पड़ा।
रास्ते में गाड़ी का एक पहिया टूट गया, और दोनों पैदल आगे बढ़े। पत्नी को प्यास लगी, तो मधुसूदन उसे एक पेड़ के नीचे बैठाकर पानी लेने गया। लौटकर उसने देखा कि उसकी ही शक्ल और कपड़ों वाला एक आदमी पत्नी के पास बैठा है। दोनों झगड़ने लगे; दोनों कहते थे कि यह मेरी पत्नी है। संगीता भी पहचान नहीं पा रही थी कि असली पति कौन है।
बात उस राज्य के राजा तक पहुँची। राजा भी कोई फ़ैसला नहीं कर सका, और सिपाहियों ने मधुसूदन को ही पकड़ लिया। तभी आकाशवाणी हुई कि मधुसूदन, तुमने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को यात्रा की; यह सब बुधदेव की लीला है।
मधुसूदन ने हाथ जोड़कर बुधदेव से क्षमा माँगी और वचन दिया कि आगे से बुधवार को ऐसी यात्रा नहीं करेगा और बुधवार का व्रत रखेगा। उसी क्षण दूसरा आदमी गायब हो गया। राजा ने दोनों को सम्मान के साथ विदा किया, और आगे जाकर उनकी गाड़ी भी ठीक मिली। घर पहुँचकर पति-पत्नी हर बुधवार व्रत रखने लगे। कथा के अनुसार, इसके बाद उनका जीवन आनंद से बीता।
नियम और किन बातों से बचें
- गणेश जी के व्रत में दिन में एक बार फलाहार लिया जाता है, जैसे दूध, फल, साबूदाना, मूँगफली या लौकी; कुछ लोग केवल जल और फल लेते हैं।
- एक परंपरा में दिन भर फलाहार करके शाम की पूजा के बाद एक बार मूँग दाल, दही या हरी चीज़ों से बना भोजन किया जाता है।
- अन्न, प्याज़, लहसुन, बासी भोजन, मांस और मदिरा से दूर रहें।
- वाणी पर संयम रखें; झूठ, छल और क्रोध से बचें।
- बुध ग्रह के व्रत में भोजन सूर्यास्त के बाद एक बार किया जाता है।
- जिन्हें स्वास्थ्य के कारण उपवास कठिन हो, वे डॉक्टर की सलाह से ही व्रत रखें।
उद्यापन
संकल्प के बुधवार पूरे होने पर आचार्य के मार्गदर्शन में उद्यापन किया जाता है। परंपरा में कलश पर गणेश जी की प्रतिमा रखकर पूजा और 108 आहुतियों का हवन होता है, 21 तरह के पत्ते, 21 तरह के फूल और 21 मोदक या लड्डू चढ़ाए जाते हैं, और ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र और दक्षिणा दी जाती है। पूरी विधि अपने पुरोहित से पूछकर करें।
लोग अक्सर पूछते हैं
बुधवार को ससुराल से विदाई क्यों टाली जाती है?
यह बात बुधवार व्रत की कथा से जुड़ी है: कथा में मधुसूदन सास-ससुर के मना करने पर भी बुधवार को पत्नी को विदा कराकर चला और मुश्किल में पड़ा। परंपरा में इसी कारण बुधवार को ऐसी यात्रा टाली जाती है।
बुधवार व्रत कितने रखें?
गणेश जी के व्रत में 11, 21 या 31 बुधवार का संकल्प लिया जाता है; कई लोग 7 रखते हैं। बुध ग्रह का व्रत लगातार 7 बुधवार का होता है।
बुधवार व्रत में क्या खाएँ?
परंपरा के अनुसार फलाहार: दूध, फल, साबूदाना, मूँगफली। एक परंपरा में शाम की पूजा के बाद मूँग दाल या हरी चीज़ों का एक भोजन किया जाता है।
