दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता
कोलकाता में हुगली के पूर्वी तट पर माँ भवतारिणी का नवरत्न मंदिर, जिसे रानी रासमणि ने 1855 में बनवाया: दर्शन और आरती का समय, मंदिर के नियम, तीन प्रमुख काली पूजाएँ, पहुँचने का रास्ता और आसपास के स्थान।
समय की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से हुई है; मंदिर में ऑनलाइन बुकिंग नहीं है
अंतिम जाँच:
त्योहारों और कुछ मौसमों में मंदिर का समय बदलता है। यात्रा से पहले आधिकारिक वेबसाइट देख लें।
यात्रा की योजना
- दर्शन का समय एक नज़र में
- अगला त्योहार: दीपान्विता काली पूजा ·
- रास्ता देखें: दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
जाने से पहले: चेकलिस्ट
- देखें: दर्शन का समय देख लें
- देखें: वेशभूषा और नियम पढ़ लें
- देखें: पहुँचने का रास्ता तय कर लें
- देखें: त्योहारों की तारीख़ें नोट कर लें
- देखें: "रास्ता देखें" लिंक पास रखें
आपके टिक केवल इसी डिवाइस पर सेव रहते हैं।
देवता
माँ काली, भवतारिणी के रूप में (मंदिर ट्रस्ट के अनुसार श्री श्री जगदीश्वरी कालीमाता ठाकुरानी)
संक्षिप्त इतिहास
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार रानी रासमणि ने 1847 में हुगली (भागीरथी) के पूर्वी तट पर यह भूमि ख़रीदी और यहाँ नवरत्न मंदिर, बारह शिव मंदिर, एक विष्णु (राधाकांत) मंदिर और नाटमंदिर बनवाने का निश्चय किया। 31 मई 1855 को, जगन्नाथ की स्नानयात्रा के दिन, मंदिर में देव-प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा हुई। निर्माण में आठ-नौ वर्ष लगे।
मुख्य मंदिर बंगाल की नवरत्न (नौ शिखरों वाली) शैली में बना है। गर्भगृह में काले पत्थर की माँ काली लेटे हुए शिव के ऊपर खड़ी हैं, और भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार दोनों चाँदी के सहस्रदल कमल पर विराजमान हैं। परिसर में बारह छोटे शिव मंदिर भी हैं।
ट्रस्ट के अनुसार रानी रासमणि ने कामारपुकुर के पंडित रामकुमार चट्टोपाध्याय को काली मंदिर का पुजारी नियुक्त किया था। उनके छोटे भाई, किशोर रामकृष्ण, प्रतिष्ठा के समय यहीं थे। आगे चलकर श्री रामकृष्ण परमहंस ने इसी परिसर में साधना की, और उनके पास आने वालों में नरेंद्रनाथ दत्त, यानी स्वामी विवेकानंद, भी थे। परिसर के उत्तर-पश्चिम कोने में श्री रामकृष्ण का कमरा आज भी दर्शन के लिए है।
मंदिर का प्रबंध "दक्षिणेश्वर काली टेंपल एंड देबोत्तर एस्टेट" का न्यासी मंडल करता है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
सबसे पास का हवाई अड्डा कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। वहाँ से टैक्सी मिलती है।
रेल मार्ग
दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन सियालदह–डानकुनी लाइन पर है, और सियालदह से चलने वाली ज़्यादातर लोकल ट्रेनें (ख़ासकर डानकुनी लोकल) यहाँ रुकती हैं। मेट्रो की ब्लू लाइन का अंतिम स्टेशन दक्षिणेश्वर भी पास है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन, दोनों से एक स्काईवॉक सीधे मंदिर तक आता है।
सड़क मार्ग
कोलकाता और हावड़ा से बसें और टैक्सी मिलती हैं। नदी के पार बाली, उत्तरपाड़ा और डानकुनी की ओर से विवेकानंद सेतु और निवेदिता सेतु दक्षिणेश्वर तक आते हैं। ट्रस्ट के अनुसार स्काईवॉक के पास पार्किंग है।
नदी का रास्ता भी है: चाँदनी घाट से बेलूड़ मठ के लिए फ़ेरी चलती है।
दर्शन का समय
दर्शन का समय एक नज़र में
- 06:30 – 12:30
- 15:30 – 19:30
आरती: 04:00, 18:30
यह पट्टी नीचे दिया गया रोज़ का समय दिखाती है। त्योहारों और विशेष दिनों पर समय बदलता है; यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।
मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट के अनुसार:
- दर्शन: सुबह 6:30 से दोपहर 12:30 तक, और दोपहर 3:30 से शाम 7:30 तक
- मंगल आरती: सुबह 4:00
- भोग: दोपहर 12:30 (इसके बाद गर्भगृह दोपहर 3:30 तक बंद रहता है)
- संध्या आरती: शाम 6:30
- शीतल भोग और शयन: रात 8:00
ट्रस्ट ने लिखा है कि न्यासी मंडल ज़रूरत पड़ने पर समय बदल सकता है।
दर्शन और कतार
ट्रस्ट के अनुसार माँ भवतारिणी का दर्शन सबके लिए निःशुल्क है। दर्शन के लिए कोई ऑनलाइन बुकिंग नहीं है; दर्शन मंदिर पहुँचकर, कतार में होता है। मुख्य द्वार पर सुरक्षा जाँच होती है, और बैग, सामान और जूते तय काउंटरों पर जमा करके ही मंदिर में जाना होता है।
ट्रस्ट के अनुसार सप्ताह के दिनों में सुबह भीड़ कम रहती है; शनिवार, मंगलवार, अमावस्या और त्योहारों पर बहुत भीड़ होती है। स्काईवॉक और परिसर में बुज़ुर्गों और दिव्यांगों के लिए रैंप हैं, और स्वयंसेवक मदद करते हैं।
यह गाइड लिखते समय ट्रस्ट की वेबसाइट पर ऑनलाइन दान और पूजा-बुकिंग का हिस्सा एक डिज़ाइन प्रोटोटाइप था, जो पेमेंट नहीं लेता। पूजा या दान के लिए मंदिर कार्यालय से संपर्क करें। मंदिर के नाम से पूजा, दान या बुकिंग का दावा करने वाली निजी वेबसाइटें भी चलती हैं। पैसे केवल मंदिर या सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर या मंदिर कार्यालय में दें। ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत 1930 पर या cybercrime.gov.in पर करें।
वेशभूषा और नियम
ट्रस्ट के नियम:
- शालीन, सम्मानजनक कपड़े पहनें।
- जूते-चप्पल तय स्टॉल पर उतारें।
- गर्भगृह के भीतर फ़ोटो खींचना मना है; बाहरी परिसर और नदी-तट पर फ़ोटो ली जा सकती है।
- चमड़े की वस्तुएँ और बड़े बैग गर्भगृह के पास ले जाना मना है।
- कतार में रहें और शांति बनाए रखें।
क्या अर्पित करें
ट्रस्ट के अनुसार भोग और प्रसाद मंदिर के काउंटरों पर मिलता है। दोपहर 12:30 बजे माँ को अन्नभोग लगता है।
त्योहार
- दीपान्विता काली पूजा — अगली तारीख़:
कार्तिक अमावस्या की रात; ट्रस्ट के अनुसार मंदिर का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव, जब पूरा परिसर दीपों से सजता है और रात भर पूजा होती है। - फलहारिणी काली पूजा
ज्येष्ठ अमावस्या की रात; ट्रस्ट के अनुसार इसी रात श्री रामकृष्ण ने श्री सारदा देवी की षोडशी पूजा की थी। - रटन्ती काली पूजा
माघ कृष्ण चतुर्दशी को। - कल्पतरु उत्सव
1 जनवरी को, ट्रस्ट के उत्सव-कैलेंडर में। - महाशिवरात्रि — अगली तारीख़:
- रथयात्रा — अगली तारीख़:
तारीख़ें KDD पंचांग से ली गई हैं और उनकी गणना उज्जैन के लिए की गई है। मंदिर अपनी अलग तारीख़ घोषित कर सकते हैं।
आसपास के स्थान
- श्री रामकृष्ण का कमरा, पंचवटी और कुठीबाड़ी (मंदिर परिसर में)
- नदी-तट के बारह शिव मंदिर और राधाकांत मंदिर (परिसर में)
- बेलूड़ मठ, नदी के उस पार (चाँदनी घाट से फ़ेरी)
आधिकारिक लिंक
ये लिंक दूसरी वेबसाइटें खोलते हैं, जो हमारी नहीं हैं। इन्हें हम नहीं चलाते, और इनके कंटेंट, बुकिंग या पेमेंट की ज़िम्मेदारी हमारी नहीं है।
- आधिकारिक वेबसाइट: dakshineswarkalitemple.org (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
- मंदिर में ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा नहीं है। दर्शन मंदिर पहुँचकर ही होते हैं।
- लाइव दर्शन (मंदिर का अपना लाइव वीडियो): youtube.com पर लाइव देखें (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं) सभी मंदिरों का लाइव दर्शन
दर्शन बुकिंग के नाम पर नकली वेबसाइटें और फ़ोन नंबर आम हैं। पेमेंट केवल ऊपर दिए आधिकारिक लिंक से करें, किसी निजी नंबर या UPI ID पर कभी नहीं।
स्थान
अक्षांश: 22.654827
देशांतर: 88.357578
रास्ता देखें: दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
पास के अन्य मंदिर
- बेलूड़ मठ (श्री रामकृष्ण मंदिर), हावड़ा सीधी दूरी लगभग 3 किमी रास्ता देखें: बेलूड़ मठ (श्री रामकृष्ण मंदिर), हावड़ा (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
- कालीघाट शक्तिपीठ, कोलकाता सीधी दूरी लगभग 15 किमी रास्ता देखें: कालीघाट शक्तिपीठ, कोलकाता (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
- बाबा तारकनाथ मंदिर, तारकेश्वर (हुगली) सीधी दूरी लगभग 43 किमी रास्ता देखें: बाबा तारकनाथ मंदिर, तारकेश्वर (हुगली) (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
- रत्नावली शक्तिपीठ, खानाकुल सीधी दूरी लगभग 51 किमी रास्ता देखें: रत्नावली शक्तिपीठ, खानाकुल (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
- विभाष (बर्गभीमा) शक्तिपीठ, तमलुक सीधी दूरी लगभग 60 किमी रास्ता देखें: विभाष (बर्गभीमा) शक्तिपीठ, तमलुक (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
- यशोरेश्वरी शक्तिपीठ, ईश्वरीपुर सीधी दूरी लगभग 87 किमी रास्ता देखें: यशोरेश्वरी शक्तिपीठ, ईश्वरीपुर (बाहरी वेबसाइट, हमारी नहीं)
ये मंदिरों के बीच की सीधी दूरियाँ हैं; सड़क से दूरी इससे अधिक होगी।
