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Puja vidhi

शिव

Maha Shivaratri puja vidhi (four prahar)

महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों की सरल पूजा: हर प्रहर में दूध, दही, घी और शहद से शिवलिंग का अभिषेक और शिव के एक रूप का मंत्र, फिर सूर्योदय पर जप और हवन।

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महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बाँटकर हर प्रहर में शिवलिंग की पूजा करने की परंपरा है। इस सरल विधि में पहले प्रहर में दूध से, दूसरे में दही से, तीसरे में घी से और चौथे में शहद से अभिषेक होता है, और हर प्रहर में शिव जी के एक रूप (ईशान, अघोर, वामदेव, सद्योजात) का मंत्र पढ़ा जाता है।

प्रहरों का समय हर साल और हर शहर के लिए अलग होता है, इसलिए उसे अपने पंचांग से देखें। घर में शिवलिंग न हो तो मिट्टी से बनाया हुआ शिवलिंग भी लिया जाता है।

Puja samagri

Vidhi, step by step

  1. पहले प्रहर में शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें और मंत्र पढ़ें।

    ह्रीं ईशानाय नमः।

    शिव जी के ईशान रूप को नमस्कार है (ह्रीं एक बीज अक्षर है)।

  2. दूसरे प्रहर में दही से अभिषेक करें और मंत्र पढ़ें। इस प्रहर में पूजा, अर्घ्य, जप और कथा भी करें।

    ह्रीं अघोराय नमः।

    शिव जी के अघोर रूप को नमस्कार है।

  3. तीसरे प्रहर में घी से अभिषेक करें और मंत्र पढ़ें। इस प्रहर में भी पूजा, अर्घ्य और जप करें।

    ह्रीं वामदेवाय नमः।

    शिव जी के वामदेव रूप को नमस्कार है।

  4. चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक करें और मंत्र पढ़ें।

    ह्रीं सद्योजाताय नमः।

    शिव जी के सद्योजात रूप को नमस्कार है।

  5. सूर्योदय होने पर पंचाक्षर मंत्र का जप करें।

    ॐ नमः शिवाय

    भगवान शिव को नमस्कार है।

  6. अंत में तिल, चावल और घी की आहुति देकर हवन करें और एक पूरा फल (जैसे सूखा नारियल) अर्पित करें।

Customs vary by family and region. Follow your family's custom.

Questions

चारों प्रहरों में किन चीज़ों से अभिषेक होता है?

इस पेज के दोनों मुख्य स्रोतों के अनुसार पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद। कुछ स्रोत हर प्रहर के लिए अलग चीज़ें बताते हैं, जैसे पंचामृत या गन्ने का रस; अपनी परंपरा मानें।

प्रहर का समय कैसे जानें?

सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को चार बराबर भागों में बाँटा जाता है। अपने शहर के लिए सही समय पंचांग से देखें।

हवन करते समय क्या सावधानी रखें?

हवन कुंड को खुली, हवादार जगह पर रखें और पास में पर्दे, कागज़ या कोई जलने वाली चीज़ न हो। आहुति थोड़ी-थोड़ी दें, बच्चों को आग से दूर रखें और पास में पानी या रेत रखें। रात भर जलते दीपक को भी सुरक्षित जगह पर रखें।

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