Skip to content
Koti Devi Devta Kundli, Muhurat, Panchang
Back

Puja vidhi

नृसिंह

Holika Dahan puja vidhi

होलिका दहन से पहले की पूजा: पवित्रीकरण, संकल्प, गणेश, अम्बिका, नृसिंह और प्रह्लाद की पूजा, होलिका की प्रार्थना, कच्चे सूत से परिक्रमा और दहन, साथ में आग से सुरक्षा।

About this text

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात को, रंगों वाली होली से एक दिन पहले, किया जाता है। यह भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है, जिसमें होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए। इस विधि में दहन से पहले गणेश जी, माँ अम्बिका, भगवान नृसिंह और भक्त प्रह्लाद की पूजा होती है, फिर होलिका की प्रार्थना, सामग्री अर्पण और कच्चे सूत से परिक्रमा, और अंत में शुभ मुहूर्त में दहन।

Puja samagri

Vidhi, step by step

  1. मंत्र पढ़ते हुए अपने ऊपर, पूजा के स्थान और सामग्री पर 3 बार जल छिड़कें।

    ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

    कमल-नयन भगवान विष्णु (हमें और इस स्थान को) पवित्र करें।

  2. हाथ में जल, अक्षत, फूल और सिक्का लेकर होलिका पूजा का संकल्प लें और उसमें अपना गोत्र, नाम और तिथि कहें।

  3. गणेश जी का ध्यान करें और गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करें।

    गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
    उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
    ॐ गं गणपतये नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

    हाथी के मुख वाले, भूतगणों आदि से सेवित, कैथ और जामुन के फल प्रेम से खाने वाले, उमा के पुत्र, शोक मिटाने वाले विघ्नेश्वर के चरण-कमलों को मैं नमस्कार करता हूँ। गणपति को नमस्कार; पाँच उपचारों के रूप में मैं गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करता हूँ।

  4. माँ अम्बिका का ध्यान करें और गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करें।

    ॐ सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
    ॐ अम्बिकायै नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

    सब मंगलों में मंगलमयी, कल्याण करने वाली, सब प्रयोजन पूरे करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी, आपको नमस्कार है। माँ अम्बिका को नमस्कार; पाँच उपचारों के रूप में मैं गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करता हूँ।

  5. भगवान नृसिंह का ध्यान करें और गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करें।

    ॐ नृसिंहाय नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

    भगवान नृसिंह को नमस्कार; पाँच उपचारों के रूप में मैं गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करता हूँ।

  6. भक्त प्रह्लाद को प्रणाम करके फूल अर्पित करें।

    ब्रह्मादयः सुरगणा मुनयोऽथ सिद्धाः सत्त्वैकतानगतयो वचसां प्रवाहैः।
    नाराधितुं पुरुगुणैरधुनापि पिप्रुः किं तोष्टुमर्हति स मे हरिरुग्रजातेः॥
    ॐ प्रह्लादाय नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

    प्रह्लाद कहते हैं: ब्रह्मा आदि देवता, मुनि और सिद्ध, जिनका मन सदा सत्त्व में लगा रहता है, अपनी वाणी की धाराओं और अनेक गुणों से आज तक जिन हरि को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सके, क्या वे हरि मुझ जैसे असुर-कुल में जन्मे की स्तुति से प्रसन्न हो सकते हैं? भक्त प्रह्लाद को नमस्कार; पाँच उपचारों के रूप में मैं गन्ध, अक्षत और फूल अर्पित करता हूँ।

  7. होलिका के सामने खड़े होकर हाथ जोड़ें और प्रार्थना का श्लोक पढ़ें।

    असृक्पाभयसंत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।
    अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव॥

    हे होलिका, रक्त पीने वाले राक्षसों के डर से घबराए भोले लोगों ने तुम्हें बनाया है; इसलिए मैं तुम्हारी पूजा करूँगा। हे भूति (ऐश्वर्य) रूपी देवी, तुम ऐश्वर्य देने वाली बनो।

  8. होलिका को अक्षत, गन्ध, फूल, साबुत मूँग, हल्दी की गाँठें, नारियल और बड़कुल की माला अर्पित करें, फिर कच्चे सूत को 3, 5 या 7 बार लपेटते हुए परिक्रमा करें।

  9. शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करें। अगली सुबह उसकी राख (भस्म) ली जाती है।

Customs vary by family and region. Follow your family's custom.

Rules and what to avoid

  • होलिका दहन का मुहूर्त पंचांग से देखकर ही दहन करें; अशुभ समय में दहन नहीं किया जाता।

Questions

होलिका दहन कब किया जाता है?

फाल्गुन पूर्णिमा की रात को, रंगों वाली होली से एक दिन पहले। दहन का मुहूर्त हर साल अलग होता है और भद्रा का ध्यान रखा जाता है, इसलिए समय अपने पंचांग से देखें।

होलिका की आग के पास क्या सावधानी रखें?

परिक्रमा आग जलने से पहले करें और दहन के समय उचित दूरी पर रहें। बाल बाँधकर रखें, ढीले दुपट्टे और सिंथेटिक कपड़े आग से दूर रखें, बच्चों का हाथ पकड़े रहें, आग में प्लास्टिक या टायर न डालें और पास में पानी या रेत रखें।

होलिका की प्रार्थना के शब्द अलग क्यों मिलते हैं?

इस श्लोक का एक और रूप भी छपा मिलता है, जो 'अहकूटा भयत्रस्तैः' से शुरू होकर 'भूति-भूति प्रदायिनीम्' पर खत्म होता है। यह पेज वह रूप देता है जो इसके दोनों मुख्य स्रोतों में एक जैसा छपा है।

This page is inside the app. Its full page on the website is kotidevidevta.org/holika-dahan-puja-vidhi/.

Kundali

The full chart is shown at first. Zoom in, then scroll or drag to see more.

100%