मंगल स्तोत्र

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Mangal Stotram

रक्ताम्बरो रक्तवपु: किरीटी, चतुर्मुखो मेघगदो गदाधृक ।

धरासुत: शक्तिधरश्च शूली, सदा मम स्याद वरद: प्रशान्त: ।।1।।

धरणीगर्भसंभूतं विद्युतेजसमप्रभम ।

 कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम ।।2।।

ऋणहर्त्रे नमस्तुभ्यं दु:खदारिद्रनाशिने ।

नमामि द्योतमानाय सर्वकल्याणकारिणे ।।3।।

देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसपन्नगा: ।

सुखं यान्ति यतस्तस्मै नमो धरणि सूनवे ।।4।।

यो वक्रगतिमापन्नो नृणां विघ्नं प्रयच्छति ।

पूजित: सुखसौभाग्यं तस्मै क्ष्मासूनवे नम: ।।5।।

प्रसादं कुरु मे नाथ मंगलप्रद मंगल ।

मेषवाहन रुद्रात्मन पुत्रान देहि धनं यश: ।।6।।

 इति मन्त्रमहार्णवे मंगल स्तोत्रम

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Gyanchand Bundiwal
Gemologist, Astrologer. Owner at Gems For Everyone and Koti Devi Devta.
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