इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें

ग्रह देव केतु की पूजा आराधना तब आवश्यक हो जाती है जब कुंडली के शुभ भावों पे इनका अशुभ प्रभाव हो जाता है। केतु अपना फल अप्रत्याशित रूप से देने के लिए प्रसिद्ध हैं। यह राहु की ही भांति एक छाया ग्रह हैं, कुछ मामलों को छोड़ दें तो केतु भी राहु के जैसे ही फल देते हैं राहु जहाँ पाप के कारक है वहीँ केतु मोक्ष के कारक कहे जाते है। अगर केतु शुभ हैं तो मंत्र विद्या में निपुण बनाते हैं, इनका चिन्ह है ध्वज है और ध्वज सफलता, विजय, प्रभुत्व का प्रतिक है अर्थात इनकी शुभता से जीवन में ऊंचाई प्राप्त होती है केतु में जातक को उच्चता प्रदान करने की शक्ति है अतः शुभ केतु युक्त जातक नित नई सफलता प्राप्त करता है। जीरो से हीरो बनने वाली ज्यादातर स्थिति शुभ केतु की ही देन होती है।

वही केतु के कुंडली में अशुभ होने पर जातक में स्नायु रोग, मानसिक कष्ट, कोंढ, ॐचे पद से अचानक निचे आ जाना, पिशाच बाधा, सिर में अचानक चोट लगना, पागलपन, संधिवात, अचानक वाहन दुर्घटना, जेल की सजा, सर्प दंश, नौकरी छूटना, बेहोश होने की बीमारी, फ़ूड प्वाईजनिंग, अचानक दुर्घटनाऑ का बढ़ जाना जैसे नकारत्मक फल मिलते हैं।

अपनी जन्म कुंडली से जाने आपके 15 वर्ष का वर्षफल, ज्योतिष्य रत्न परामर्श, ग्रह दोष और उपाय, लग्न की संपूर्ण जानकारी, लाल किताब कुंडली के उपाय, और अन्य जानकारी, अपनी जन्म कुंडली बनाने के लिए यहां क्लिक करें।

जानिये:
केतु देव की प्रसन्नता हेतु कौन से मंत्र का जप-पूजा करें?
केतु देव की प्रसन्नता हेतु कौन से दान करें?
कुंडली में केतु की शुभ-अशुभ स्थिति में कौन से उपाय करें जिनसे उनके शुभ फल प्राप्त कर सकते है?

निचे दिए गए किसी भी मंत्र द्वारा केतु ग्रह का शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है, इनमें से एक अथवा कई उपाय एक साथ किए जा सकते है यह अपनी श्रद्धा पर निर्भर करता है। यह सभी आजमाए हुए फलित उपाय है।

केतु ग्रह के संपूर्ण मंत्र एवं अचूक उपाय

केतु ग्रह का पौराणिक मंत्र

ॐ पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।।
जप संख्या: 17000

केतु ग्रह का गायत्री मंत्र

ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो केतुः प्रचोदयात् ।।
जप संख्या: 17000

केतु ग्रह का वैदिक मंत्र

ॐ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मर्या अपनयशसे।
समुषद्भिरजायथाः।।
जप संख्या_ 17000

केतु ग्रह का बीज मंत्र

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।।
जप संख्या_17000
समय: शुक्लपक्ष मंगलवार

केतु ग्रह तांत्रिक मंत्र

ॐ कें केतवे नमः
जप संख्या_ 17000

केतु ग्रह पूजा मंत्र

ॐ कें केतवे नमः
जप संख्या_ 17000
यह मंत्र बोलते हुए देव ग्रह केतु एवं केतु यंत्र की पूजा करनी चाहिए।

केतु ग्रह का दान

ग्रह देव केतु की कृपा प्राप्ति हेतु किसी युवा व्यक्ति को सतनाजा, लहसुनियाँ, कंबल, धुएं जैसे रंग के वस्त्र, कस्तूरी, लहसुनिया, लोहा, तिल, तेल, खट्टे फल, स्टील के आठ बर्तन, लवंग, हवन सामग्री, छुरी अथवा तलवार, रांगा, सुरमा, आदि का दान करने से केतु ग्रह की शांति होती है। ज्योतिष शास्त्र में केतु ग्रह को अशुभ ग्रह माना गाया है अतः जिस जातक की कुंडली में केतु की दशा चल रही है और उसे अशुभ परिणाम प्राप्त हो रहे हैं तो शांति हेतु जो उपाय किया जा सकता हैं उनमें दान का स्थान प्रथम है। यह दान रात्रि में करते हैं 12 बजे, अब बारह बजे तो कोई दान दे नहीं सकता तो चाहिए यह की रात्रि 12 बजे इन सब चीजों को इकट्ठा निकाल कर घर के बहार रख दें और सुबह बुधवार को किसी योग्य व्यक्ति को दान करें।

ध्यान दे – कर्ज और उधार लेकर कभी दान न दें तथा जो व्यक्ति श्रम करने के योग्य होकर भी भीख मांगते हैं ऐसे लोगों को भूलकर भी दान नहीं देना चाहिए।

केतु ग्रह का व्रत

केतु की अनुकूलता प्राप्त करने हेतु विघ्न हर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा करनी चाहिये, व्रत करने से भी ग्रहों का प्रकोप कम हो जाता है। क्योंकि जो वार जिस ग्रह से प्रभावित होता है उसी वार का अगर व्रत किया जाए तो उस ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है। केतु ग्रह का वार भी मंगल ग्रह की तरफ मंगलवार होता है। मंगलवार को अगर आप व्रत करते हैं तो केतु ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है। प्रथम बार दाहिने हाथ में जल लेकर केतु देव से अपनी समस्याओं के निवारण की प्रार्थना करते हुए कितने मंगलवार का आप व्रत करेंगे बोलते हुए संकल्प करना चाहिए और वह जल भूमि पर छोड़ देना चाहिए।

(संकल्प सिर्फ पहली बार करना है उसके बाद जितने मंगलवार का संकल्प लिया था उतना मंगलवार पूर्ण होने पर करना है ठीक उसी तरह जैसे पहली बार किया गया था अबकी बार ग्रह देव केतु का धन्यवाद बोलते हुए जल निचे गिरा देना होता है) तत्पश्चात पूजन और व्रत करना चाहिए। व्रत के दिन दूध, फल, चाय ले सकते हैं। और दिन डूबने के बाद भोजन किया जा सकता है पर भोजन सात्विक ही हो। इस दिन कुत्ते को आहार दें एवं ब्राह्मणों को भात खिलायें इससे भी केतु की दशा शांत होगी।

जितना संकल्प लिया था उतना व्रत पूर्ण होने पर व्रत का पारण करना चाहिए, किसी योग्य बुजुर्ग ब्राह्मण को घर पर बुलाकर भोजन करना चाहिए व केतु देव की वस्तु दान करनी चाहिए।

किसी को अपने मन की बात नहीं बताएं एवं बुजुर्गों एवं संतों की सेवा करें यह केतु की दशा में राहत प्रदान करता है ।

केतु ग्रह के कुंडली में शुभ स्थिति में होने पर

  • गणेश जी के मंदिर में मंगलवार को लड्डू का भोग लगाकर उसका प्रसाद ग्रहण करने से केतु के शुभ फल मिलते हैं।
  • संकष्ट चतुर्थी का व्रत करने से भी केतु का शुभ फल प्राप्त होता है।
  • अगर जन्म कुंडली में केतु बलवान हो और शुभ ग्रहों की युति में हो तो लहसुनिया (Cat’s Eye) रत्न पंच धातु में जड़वाकर सीधे हाथ की अनामिका उंगली में धारण करने से केतु का बल बढ़ जाता है।
  • काले और सफेद रंग के कपडे पहनने से केतु का प्रभाव बढ़ता है।
  • बटुक भैरव की उपासना करें ।
  • घर में ताम्बे के नाग देवता स्थान देकर उनकी पूजा करें।
  • रात्रि में लोहे अथवा स्टील के बर्तन में पानी रख कर सोये और सुबह उस पानी को पिएँ ।
  • घर में हाथी दांत की कोई वास्तु रखें ।
  • स्टील अथवा लोहे की बनी नाग की आकृति वाली अंगूठी धारण करें।
  • घर में भूरें रंग का कुत्ता पालें और उसे रोज अपने हाथ से भात खिलाएं ।
  • घर के आसपास जगह हो तो अपने हाथों से एक निम का पेड़ लगायें।

ग्रहदेव केतु के कुंडली में नीच एवं अशुभ होने पर

  • काले और सफेद रंग के कंबल गरीबों को एवं मंदिर में दान देने चाहिए।
  • सफेद तिल एवं काले तिल को सफेद कपडे में बांधकर बहते हुए जल में प्रभावित करना चाहिए।
  • रंग-विरंगी गाय की सेवा करनी चाहिए तथा रंग बिरंगे कुत्ते को दूध और रोटी खिलाना चाहिए।
  • पीपल के पेड़ में या मंदिर में खूब ॐची ध्वजा-पताका बांधनी चाहिए।
  • केतु की दशा अन्तर्दशा में मूत्र विशर्जन में तकलीफ हो तो दोनों पैरों के अंगूठे में सफ़ेद रेशमी धागा बांधे आराम मिलेगा।
  • वर्ष में एक बार कला अथवा भूरा कम्बल किसी वृद्ध ब्राह्मण को अवश्य दान करें, कूद कम्बल का प्रयोग न करें।
  • घर में नित्य गूगल की धुप दें।
  • श्रवण मास में रुद्राभिषेक घर में अवश्य करवाएं।
  • नित्य शिवजी के द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम का उच्चारण करें।
  • केतु को जो वस्तुएं दान की जाती हैं उनको किसी से उपहार में न लें ।
  • घर में अपनी स्त्री को बोले वह आटा गुथकर गोल रूप न दे और न ही गुथा आटा फ्रिज में रखे ।
  • युवा लोगों को खट्टी चीजें खिलाएं ।

इनके अलावा केतु ग्रह से संबंधित कैसी भी परेशानी हो तो स्कन्द पुराण में वर्णित इस निम्नलिखित स्तोत्र का नित्य पाठ करें अगर नित्य संभव न हो तो किसी भी शुक्ल पक्ष के मंगलवार से प्रारम्भ कर के हर मंगलवार को नियम पूर्वक इसका पाठ करें, इस पाठ का बहुत ही महत्व है, इससे ग्रह देव केतु की शुभ कृपा से जीवन के सभी मनोरथ सफल होते हैं।

विधि- सर्व प्रथम स्नान आदि से निवृत होकर कम्बल के आसन पर बैठकर ग्रह देव केतु का ध्यान करें व श्रद्धा पूर्वक उनका पंचोपचार (धुप, गंध / चन्दन, दीप, पुष्प, नैवेद्य इससे किसी भी देवता की पूजा को पंचोपचार पूजन कहते हैं) पूजन करें फिर अपने दाहिने हाथ में जल लेकर विनियोग करें अर्थात निचे लिखे मंत्र को पढ़ें।

विनियोग मंत्र –

अस्य श्रीकेतु पंचविंशतिनामस्तोत्रस्य मधु छन्द विछ्न्दो केतुर्देवता केतुप्रित्यर्थे पाठे विनियोगः।

अब हाथ में लिया हुआ जल धरती पर छोड़ दें और भक्ति पूर्वक पाठ करें।

केतु स्तोत्र

केतु: काल: कलयिता धूम्रकेतुर्विवर्णक:।
लोककेतु महाकेतु: सर्वकेतुर्भयप्रद: ।।1।।
रौद्रो रूद्रप्रियो रूद्र: क्रूरकर्मा सुगन्ध्रक्।
फलाश-धूम-संकाशश्चित्र-यज्ञोपवीतधृक् ।।2।।
तारागणविमर्दो च जैमिनेयो ग्रहाधिप:।
पंचविंशति नामानि केतुर्य: सततं पठेत् ।।3।।
तस्य नश्यंति बाधाश्च सर्वा: केतुप्रसादत:।
धनधान्यपशूनां च भवेद् व्रद्विर्न संशय: ।।4।।
।। इति शुभम्।।

केतु देव की स्तुति

जय श्री केतु कठिन दुखहारी,
करहु सुजन हित मंगलकारी ।
ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला,
घोर रौद्रतन अघमन काला ।
शिखी तारिका ग्रह बलवान,
महा प्रताप न तेज ठिकाना ।
वाहन मीन महा शुभकारी,
दीजै शान्ति दया उर धारी ।

इस तरह आप केतु देव के मंत्र, व्रत और पूजा करके केतु ग्रह को प्रसन्न कर सकते है. कुंडली में दूसरे ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र, व्रत और पूजा की जानकारी जानने के लिए हमारी ग्रह देव मंत्र एवं उपाय की सूची को देखिये

अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें, ज्योतिष, हिंदू त्योहार, देवी देवताओ की जानकारी और कई अन्य जानकारी के लिए। आप हमसे Facebook और Instagram पर भी जुड़ सकते है

अपनी जन्म कुंडली से जाने आपके 15 वर्ष का वर्षफल, ज्योतिष्य रत्न परामर्श, ग्रह दोष और उपाय, लग्न की संपूर्ण जानकारी, लाल किताब कुंडली के उपाय, और अन्य जानकारी, अपनी जन्म कुंडली बनाने के लिए यहां क्लिक करें।

नवग्रह के नग, नेचरल रुद्राक्ष की जानकारी के लिए आप हमारी साइट Gems For Everyone पर जा सकते हैं। सभी प्रकार के नवग्रह के नग – हिरा, माणिक, पन्ना, पुखराज, नीलम, मोती, लहसुनिया, गोमेद मिलते है। 1 से 14 मुखी नेचरल रुद्राक्ष मिलते है। सभी प्रकार के नवग्रह के नग और रुद्राक्ष बाजार से आधी दरों पर उपलब्ध है। सभी प्रकार के रत्न और रुद्राक्ष सर्टिफिकेट के साथ बेचे जाते हैं। रत्न और रुद्राक्ष की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें
Default image
Gyanchand Bundiwal
Gemologist, Astrologer. Owner at Gems For Everyone and Koti Devi Devta.
Articles: 449

Leave a Reply

नए अपडेट पाने के लिए अपनी डिटेल्स शेयर करे

नैचरॅल सर्टिफाइड रुद्राक्ष कॉम्बो ऑफर

3, 4, 5, 6 और 7 मुखी केवल ₹800