सिंह लग्न
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सिंह लग्न में सूर्य लग्नेश प्रथम भाव का स्वामी होता है जीवन में आत्मविश्वास आरोग्यता उन्नति प्रदान करता है इसके लिए सूर्य का रत्न माणिक धारण करना चाहिए

मंगल चतुर्थ व  नवम भाव का स्वामी है अतः मंगल का रत्न मूंगा धारण करने से पारिवारिक संपत्ति वह भाग्य संबंधित क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है

बुध का रत्न पन्ना द्वितीय अतः एकादश भाव लाभ स्थान का स्वामी है धन संबंधित समस्याओं के लिए बुध का रत्न पन्ना धारण कर सकते हैं  इस कारण अगर बुध की महादशा हो तो पन्ना पहनना चाहिए ।

बुध द्वितीय में स्थित हो तो वृद्धावस्था में पन्ना नहीं पहनना चाहिए  परंतु द्वितीयेश होकर मारक प्रभाव भी रखता है

सिंह लग्न मैं बृहस्पति पंचमेश त्रिकोण स्थान का स्वामि होने के कारण से  जातक को पुत्र संतान व विद्या प्राप्ति के लिए  गुरु का रत्न पुखराज धारण करना लाभदायक होता है

सिंह लग्न  सूर्य  का रत्न माणिक सूर्य के होरे में और बृहस्पति का रत्न पुखराज बृहस्पति के होरे में और मंगल का रत्न मूंगा मंगल के होरे में और बुध का रत्न पन्ना बुधवार को बुध के होरे  में धारण करने चाहिये या कोई भी पुष्य नक्षत्र या गुरु पुष्य नक्षत्र मैं धारण करना

चाहिये सिंह लग्न में कौन से रत्न नहीं  पहनना चाहिए  मोती  हीरा  नीलम  कभी धारण नहीं करना चाहिये

यह ध्यान रहे उस वक्त राहु काल ना हो कोई भी रत्न सवा 4 कैरेट से 8 कैरेट के बीच में जो भी वजन का मिले वह उंगली में या  लॉकेट में धारण  करना चाहिये

सिंह लग्न में सूर्य लग्नेश प्रथम भाव का स्वामी होता है जीवन में आत्मविश्वास आरोग्यता उन्नति प्रदान करता है इसके लिए सूर्य का रत्न माणिक धारण करना चाहिए

मंगल चतुर्थ व  नवम भाव का स्वामी है अतः मंगल का रत्न मूंगा धारण करने से पारिवारिक संपत्ति वह भाग्य संबंधित क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है

बुध का रत्न पन्ना द्वितीय अतः एकादश भाव लाभ स्थान का स्वामी है धन संबंधित समस्याओं के लिए बुध का रत्न पन्ना धारण कर सकते हैं  इस कारण अगर बुध की महादशा हो तो पन्ना पहनना चाहिए ।

बुध द्वितीय में स्थित हो तो वृद्धावस्था में पन्ना नहीं पहनना चाहिए  परंतु द्वितीयेश होकर मारक प्रभाव भी रखता है

सिंह लग्न मैं बृहस्पति पंचमेश त्रिकोण स्थान का स्वामि होने के कारण से  जातक को पुत्र संतान व विद्या प्राप्ति के लिए  गुरु का रत्न पुखराज धारण करना लाभदायक होता है

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चाहिये सिंह लग्न में कौन से रत्न नहीं  पहनना चाहिए  मोती  हीरा  नीलम  कभी धारण नहीं करना चाहिये

यह ध्यान रहे उस वक्त राहु काल ना हो कोई भी रत्न सवा 4 कैरेट से 8 कैरेट के बीच में जो भी वजन का मिले वह उंगली में या  लॉकेट में धारण  करना चाहिये


नवग्रह के नवरत्न

नेचुरल ओरिजिनल रुद्राक्ष

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ज्ञानचंद बुंदिवाल

जेम्स फॉर एवरीवन

जेमोलॉजिस्ट, ज्योतिष

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श्री हनुमान स्तोत्र

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