रुद्राक्ष 1 से 25

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रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रतिरूप माना जाता है । इस नश्वर संसार में हर मनुष्य को रुद्राक्ष धारण करना चाहिए ।
जानते है कि भगवान शिव के प्रतिक माने जाने वाले रुद्राक्ष कुल कितने प्रकार है ।
और उनके पहनने से क्या-क्या लाभ होते हैं। रुद्राक्ष को धारने करने वाले के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। शिवमहापुराण ग्रंथ के अनुसार अनेक प्रकार के रुद्राक्ष पाए जाते है सभी देवी, देवता,और, राशि के लिये अलग-अलग प्रकार के रुद्राक्ष को धारण किया जाता है। जानें रुद्राक्ष के प्रकार एवं उनसे धारण करने की विधि ओर उससे होने वाले लाभ। रुद्राक्ष धारण करने के मंत्र

1- एक मुखी रुद्राक्ष- इसे पहनने से धन धान्य, पैसा, सफलता प्राप्ति और ध्‍यान करने के लिए सबसे अधिक उत्तम होता है। इसके देवता भगवान शंकर, ग्रह- सूर्य और राशि सिंह है।
मंत्र- ॐ ह्रीं नम:

2- दो मुखी रुद्राक्ष- इसे आत्‍मविश्‍वास और मन की शांति के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान अर्धनारिश्वर, ग्रह- चंद्रमा एवं राशि कर्क है।
मंत्र- ॐ नम:

3- तीन मुखी रुद्राक्ष- इसे मन की शुद्धि और स्‍वस्‍थ जीवन के लिए पहना जाता है। इसके देवता अग्नि देव, ग्रह- मंगल एवं राशि मेष और वृश्चिक है।
मंत्र- ॐ क्‍लीं नम:

4- चार मुखी रुद्राक्ष- इसे मानसिक क्षमता, एकाग्रता और रचनात्‍मकता के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता ब्रह्म देव, ग्रह- बुध एवं राशि मिथुन और कन्‍या है।
मंत्र- ॐ ह्रीं नम:

5- पांच मुखी रुद्राक्ष- इसे ध्‍यान और आध्‍यात्‍मिक कार्यों के लिए पहना जाता है। इसके देवता भगवान कालाग्नि रुद्र, ग्रह- बृहस्‍पति एवं राशि धनु व मीन है।
मंत्र- ॐ ह्रीं नम:

6- छह मुखी रुद्राक्ष- इसे ज्ञान, बुद्धि, संचार कौशल और आत्‍मविश्‍वास के लिए पहना जाता है। इसके देवता भगवान कार्तिकेय, ग्रह- शुक्र एवं राशि तुला और वृषभ है।
मंत्र : ॐ ह्रीं हूं नम:

7- सात मुखी रुद्राक्ष- इसे आर्थिक और करियर में विकास के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता माता महालक्ष्‍मी, ग्रह- शनि एवं राशि मकर और कुंभ है।
मंत्र- ॐ हूं नम:

8- आठ मुखी रुद्राक्ष- इसे करियर में आ रही बाधाओं और को दूर करने के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान गणेश, ग्रह- राहु है।
मंत्र- ।। ॐ हूं नम:।।

9- नौ मुखी रुद्राक्ष- इसे ऊर्जा, शक्‍ति, साहस और निडरता पाने के लिए पहना जाता है।
इनकी देवी माँ दुर्गा, एवं ग्रह- केतु है।
मंत्र- ॐ ह्रीं हूं नम:

10- दस मुखी रुद्राक्ष- इसे नकारात्‍मक शक्‍तियों, नज़र दोष एवं वास्‍तु दोष और कानूनी मामलों से रक्षा के लिए धारण किया है। इसके देवता भगवान विष्‍णु जी हैं।
मंत्र- ॐ ह्रीं नम:

11- ग्‍यारह मुखी रुद्राक्ष- इसे आत्‍मविश्‍वास में बढ़ोत्तरी, निर्णय लेने की क्षमता, क्रोध पर नियंत्रण और यात्रा के दौरान नकारात्‍मक ऊर्जा से सुरक्षा पाने के लिए पहना जाता है। इसके देवता हनुमान जी है। ग्रह- मंगल एवं राशि मेष और वृश्चिक है।
मंत्र- ॐ ह्रीं हूं नम:

12- बारह मुखी रुद्राक्ष- , सफलता, प्रशासनिक कौशल और नेतृत्‍व करने के गुणों का विकास करने के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता सूर्य देव, ग्रह- सूर्य एवं राशि सिंह है।
मंत्र- ॐ रों शों नम: ऊं नम:

13- तेरह मुखी रुद्राक्ष- इसे आर्थिक स्थिति को मजबूत करने, आकर्षण और तेज के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता इंद्र देव, ग्रह- शुक्र एवं राशि तुला और वृषभ है।
मंत्र- ॐ ह्रीं नम:

14- चौदह मुखी रुद्राक्ष- इसे छठी इंद्रीय जागृत कर सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करने के उद्देश्य से धारण किया जाता है। इसके देवता शिव जी, ग्रह- शनि एवं राशि मकर और कुंभ है।
मंत्र- ॐ नम:

15- मुखी पशुपति ॐ पशुपत्यै नमः

16- मुखी महामृत्युंजय ,महाकाल ॐ ह्रौं जूं सः त्र्यंबकम् यजमहे सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय सः जूं ह्रौं ॐ

17- मुखी विश्वकर्मा ,माँ कात्यायनी ॐ विश्वकर्मणे नमः

18- मुखी माँ पार्वती ॐ नमो भगवाते नारायणाय

19- मुखी नारायण ॐ नमो भवाते वासुदेवाय

20- मुखी ब्रह्मा ॐ सच्चिदेकं ब्रह्म

21- मुखी कुबेर ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा

22 – गणेश रुद्राक्ष- इसे ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि, सभी क्षेत्रों में से सफलता के लिए, एवं केतु के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान गणेश जी हैं।
मंत्र- ॐ श्री गणेशाय नम:

23- गौरी शंकर रुद्राक्ष- इसे परिवार में सुख-शांति, विवाह में देरी, संतान नहीं होना और मानसिक शांति के लिए धारण किया जाता है। इसके देवता भगवान शिव-पार्वती जी, ग्रह- चंद्रमा एवं राशि कर्क है।
मंत्र- ॐ गौरी शंकराय नम:

24- गर्भ गौरी रूद्राक्ष माता गौरी और उनके पुत्र भगवान गणेश जी का स्वरूप माना जाता है. यह गर्भ गौरी रुद्राक्ष गौरी शंकर के समान ही दिखाई पड़ता है. जहां गौरी शंकर रुद्राक्ष में रुद्राक्ष का आकार एक समान होता है वहीं गर्भ गौरी रुद्राक्ष में एक रुद्राक्ष अन्य की तुलना में आकार में छोटा होता है. इस रुद्राक्ष में एक बडा़ रुद्राक्ष देवी पार्वती को दर्शाता है तथा अन्य रुद्राक्ष पुत्र रुप में भगवान गणेश को दर्शाता है. गर्भ गौरी रुद्राक्ष उन महिलाओं के लिए बहुत लाभदायक हैं जो मातृसुख की कामना करती हैं
मंत्र- ॐ गर्भ गौरी नम: , मंत्र का जाप करें तथा ॐ नमः शिवाय का जाप करें ।

25- त्रिजुटी रूद्राक्ष पर तीनों दानें एक साथ प्राकतिक रूप से जुड़े होते हैं, यह दुर्लभ है। यह रूद्राक्ष कई वर्षों में एक बार उत्पन्न होता है। यह ब्रह्याण्ड के मूल गुणों का प्रतीक है। इसे धारण करने मात्र से गुरू ब्रह्या, गुरू विष्णु, गुरू महेश की साक्षात कृपा प्राप्त होती है। त्रिजुटी में मुख कितने भी हो सकते हैं। यह दिव्य रूद्राक्ष है,
मंत्र -त्रिजुटी रूद्राक्ष ॐ त्र्यंबकम् यजामहे सुगंधि पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मोक्षीय मामृतात्। ॐ नमः शिवाय।

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Gyanchand Bundiwal
Gemologist, Astrologer. Owner at Gems For Everyone and Koti Devi Devta.
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