बैकुंठ चतुर्दशी

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी कहते हैं | निर्णय सिन्धु के प्रष्ट २०६ पर इसका विवरण दिया हुआ है| इसके अलावा स्मृति कोस्तुम के प्रष्ट ३८८-३८९ और पुरुषार्थ चिंतामणि के प्रष्ट २४६-२४७ पर यह विवरण है कि कार्तिक मॉस के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी को हेमलंब वर्ष में – अरुणोदय काल में ब्रह्म मुहूर्त में स्वयं भगवान ने वाराणसी में मणि कर्णिका घाट पर स्नान किया था | पाशुपत व्रत करके विश्वेश्वर ने पूजा कि थी | तब से इस दिन को काशी विश्वनाथ स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है|

एक अन्य कथानक के अनुसार भगवान विष्णु ने नारद को वचन दिया था कि जो नर-नारी इस दिन व्रत करेंगे उनके लिए स्वर्ग के द्वार खुल जायेंगे और वो यह लीला समाप्त कर बैकुंठ में निवास करेंगे | कार्तिक पूर्णिमा के ठीक एक दिन पहले पड़ने वाले इस व्रत का एक महत्व यह भी है कि यह व्रत देवोत्थानी एकादशी के ठीक तीन दिन बाद ही होता है | बैकुंठ के दिन श्री विष्णु जी की पूजा रात में करने का विधान है | जहां तक करने का सवाल है उसका जवाब श्रीमद भगवत के सातवे स्कन्द के पांचवे अध्याय के श्लोक २३ व २४ वें में दिया गया है|

श्रवण कीर्तन विष्णो: स्मरण याद्सेवनम ;
अर्चन वन्दन दास्य सख्यामातम निवेदनम |

यानि कथाएँ सुनकर , कीर्तन करके , नाम स्मरण करके , विष्णु जी की मूर्ति के रूप में, सखाभाव से आप अपने को श्री विष्णु जी को समर्पित करें |
३. दुर्घटना रहित जीवन की कामना रखने वाले को इस दिन श्री विष्णु जी का नाम स्मरण करना चाहिए |
नाम स्मरण के लिए पुरुष पंक्ति श्रेष्ट है :-
‘नामोस्त्व्नन्ताय सहस्त्र्मुतर्ताये सहस्त्रपादाख्सिशिरोसुबह्वें ‘
४. विश्वास स्तर बढ़ने के लिए इस दिन श्री विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर को नहला धुलाकर कर अच्छे वस्त्र पहना कर मूर्ति सेवा स्वर भक्ति करनी चाहिए |
मंत्र हैं
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’
५. नाम और प्रसिद्धि कि कामना रखने वाले को इस दिन श्री विष्णु जी की पूजा करके यानि पचोपचार पूजा यानि धूप , दीप नवैद्द गंध आदि से पूजा करनी चाहिए | तन्त्रशास्त्र के मतानुसार श्री विष्णु जी को अक्षत नहीं चढ़ाना चाहिए और कहना चाहिए –
‘श्रीघर माधव गोपिकवाल्लंभ , जानकी नायक रामचंद्रभये ‘
६. बेहतर नौकरी और कैरियर के लिए – बैकुन्ठ चतुर्दशी के दिन नतमस्तक होकर भी विष्णु को प्रणाम करना चाहिए और सप्तारीशियों का आवाहन उनके नामों से करना चाहिए | वे नाम हैं – मरीचि , अत्रि, अंगीरा, पुलत्स्य , ऋतू और वसिष्ठ | आहवाहन के बाद सप्तऋषियों से निवेदन करना चाहिए कि वे नारद से कहें कि वे श्री विष्णु जी के दास के रूप में आपकी स्वीकृति करवा दें | दांपत्य सुख कि कामना रखने वालों को श्री विष्णु को वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन सच्चे भाव से , मित्र की तरह स्मरण करें और उनसे अपनी इच्छा कहें | बाद में श्री राम की यह स्तुति पढनी चाहिए –
‘श्री राम राम रघुनन्दन राम राम ; श्री राम राम भारताग्रज राम राम
श्री राम राम रणककर्श राम राम ; श्री राम राम शरण भाव राम राम ‘
७. सफलता की कामना के लिए – जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के इच्छुक व्यक्ति को अपने आप को श्री विष्णु को समर्पित कर देना चाहिए और स्वयं को श्री विष्णु जी में ले कर देखना चाहिए | कर्ता भाव के तिरोहण के बाद कोई स्तुति नहीं होती फिर तो ‘ हरि मेरा सुमरन करें , मैं मगन रहूँ दिन रैन ‘
८. विद्या और ज्ञान प्राप्ति के लिए – इस दिन सेवक के रूप में श्री विष्णु जी का स्मरण करना चाहिए और कहना चाहिए :-
ॐ नम: पद्मनाभाय , दामोदराय गोविन्दाय
नारायणाय च केशवाय , मधुसूदनाय नमो नमः
इन विधियों से आपातकाम मनुष्य पुरुषार्थ चतुर्दशी को पूर्ण करके पूर्णायु होकर वैकुण्ठ जाता है |

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Gyanchand Bundiwal
Gemologist, Astrologer. Owner at Gems For Everyone and Koti Devi Devta.
Articles: 449

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